मिडिल ईस्ट: 28 फरवरी, 2026 की यह घटना अचानक नहीं हुई है। पिछले कई महीनों से क्षेत्र में सैन्य लामबंदी और कूटनीतिक विफलताएं इस विनाशकारी मोड़ की ओर बढ़ रही थीं।
नवंबर 2025 में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के नए स्तरों की घोषणा की, जिससे अमेरिका और इज़रायल की चिंताएं बढ़ गईं। इसी दौरान ओमान की मध्यस्थता में हुई गुप्त वार्ताएं बेनतीजा रहीं। जनवरी 2026 (मध्य) में इज़रायली खुफिया एजेंसियों ने दावा किया कि ईरान अपनी मिसाइलों की रेंज बढ़ा रहा है। इज़रायल ने स्पष्ट चेतावनी दी कि वह अपनी सुरक्षा के लिए "किसी भी सीमा तक" जा सकता है। फरवरी 2026 (शुरुआती सप्ताह) में अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए। जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सैन्य अभ्यास शुरू किया, जिसे विश्व शक्तियों ने "अस्थिर करने वाला कदम" बताया। 25 फरवरी, 2026 को वाशिंगटन में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में कथित तौर पर इज़रायल ने अमेरिका को सैन्य विकल्प (Military Option) पर विचार करने की जानकारी दी। ईरान ने इसे "युद्ध की धुन" करार दिया।27 फरवरी, 2026 को ईरान समर्थित समूहों और इज़रायली सेना के बीच सीमावर्ती इलाकों में छिटपुट झड़पें हुईं, जिसने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। 28 फरवरी, 2026 को इज़रायल ने ईरान के भीतर हवाई हमले किए, जिसमें स्कूलों को निशाना बनाए जाने की दर्दनाक खबरें आईं, जिसने पूरे वैश्विक परिदृश्य को बदल दिया।
यह टाइमलाइन दर्शाती है कि कैसे एक-दूसरे पर विश्वास की कमी, सैन्य हथियारों की होड़ और कूटनीतिक वार्ता के बंद होने से स्थिति यहाँ तक पहुंची। अब सवाल यह है कि क्या यह सैन्य कार्रवाई यहीं थमेगी, या यह एक लंबे संघर्ष की शुरुआत है?