वाशिंगटन/हवाना। महीनों से क्यूबा पर थोपी गई तेल की नाकेबंदी के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अमेरिकी सरकार ने घोषणा की है कि वह अब कंपनियों को क्यूबा को वेनेजुएला का तेल दोबारा बेचने की अनुमति देगी। हालांकि, यह राहत कुछ कड़े प्रतिबंधों और शर्तों के साथ दी गई है।
क्यों बदला अमेरिका ने अपना फैसला?
कैरेबियन देशों (CARICOM) के नेताओं द्वारा क्यूबा में गहराते मानवीय संकट और ऊर्जा की भारी कमी पर चिंता जताने के बाद अमेरिका ने यह कदम उठाया है। क्यूबा इस समय अपने दशकों के सबसे खराब ईंधन संकट से गुजर रहा है, जहाँ 20-20 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है और अस्पताल व स्कूल बुरी तरह प्रभावित हैं।
क्या हैं नई शर्तें?
अमेरिकी वित्त विभाग (US Treasury Department) ने स्पष्ट किया है कि:
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केवल 'वाणिज्यिक और मानवीय उपयोग' के लिए ही तेल की बिक्री की जा सकेगी।
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सैन्य और सरकारी संस्थानों पर पाबंदी: क्यूबा की सेना, खुफिया सेवाओं या अन्य सरकारी संस्थानों से जुड़ी संस्थाओं को तेल बेचने की अनुमति नहीं होगी।
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विशेष लाइसेंस अनिवार्य: तेल बेचने वाली कंपनियों को अमेरिकी सरकार से विशेष लाइसेंस लेना होगा।
वेनेजुएला और क्यूबा के बीच का समीकरण
वेनेजुएला क्यूबा को तेल देने वाला सबसे बड़ा देश रहा है। जनवरी 2026 में अमेरिकी कार्रवाई के बाद, जब अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल उद्योग पर नियंत्रण कर लिया था, तब से क्यूबा को होने वाली तेल की आपूर्ति ठप थी। ट्रम्प प्रशासन का लक्ष्य 2026 के अंत तक क्यूबा में 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना बताया जा रहा है।
क्या क्यूबा को मिलेगी राहत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्यूबा को पहले की तरह रियायती दरों पर तेल नहीं मिला, तो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए उबरना मुश्किल होगा। वर्तमान में क्यूबा अपनी 90% ईंधन आपूर्ति खो चुका है। हालांकि, मेक्सिको, रूस और कनाडा जैसे देश भी क्यूबा को मानवीय सहायता और भोजन भेजकर मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।