वॉशिंगटन/तेहरान (5 मार्च, 2026): ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच चल रहे युद्ध के छठे दिन एक बड़ा खुलासा हुआ है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अंदरूनी हालात बिगाड़ने के लिए विभिन्न कुर्द विद्रोही समूहों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।
ट्रंप किन समूहों से कर रहे हैं बात?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने हाल के दिनों में कम से कम तीन प्रमुख कुर्द समूहों के नेताओं से चर्चा की है: मसूद बरज़ानी (KDP): इराकी कुर्दिस्तान के सबसे प्रभावशाली नेता। बाफ़ेल तलबानी (PUK): इराकी कुर्दिस्तान के विपक्षी नेता, जिन्होंने ट्रंप के साथ बातचीत की पुष्टि की है। मुस्तफा हिजरी (KDPI): ईरानी कुर्द लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख।
अमेरिका का प्लान क्या है?
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन कुर्द समूहों को सक्रिय करके ईरानी सेना का ध्यान भटकाया जा सकता है। प्लान यह है कि कुर्द समूह उत्तरी ईरान के इलाकों पर कब्जा कर सकें ताकि इज़राइली सेना के लिए एक सुरक्षित रास्ता बन सके। ईरान के अंदर सरकार विरोधी भावनाओं को हवा देकर तख्तापलट की कोशिश करना। ईरानी कुर्द समूहों ने हाल ही में 'CPFIK' नाम से एक गठबंधन बनाया है, जो सीधे ईरानी सेना को चुनौती दे रहा है।
ईरान का पलटवार:
इस खतरे को भांपते हुए ईरान ने गुरुवार को इराक के कुर्द इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन से ताबड़तोड़ हमले किए हैं। तेहरान का कहना है कि वे "अलगाववादी ताकतों" को कुचल देंगे जो विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन कुर्द समूहों को 'शतरंज के मोहरों' की तरह इस्तेमाल कर रहा है। खतरा यह है कि अगर यह मिशन नाकाम रहा, तो कुर्दों को एक बार फिर भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, जैसा कि पहले भी सीरिया में हो चुका है।