अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 6-3 के बहुमत से एक फैसला सुनाया था, जिसमें 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत बिना कांग्रेस की मंजूरी के टैरिफ लगाने के राष्ट्रपति के अधिकार को खारिज कर दिया गया था। इस फैसले को ट्रंप ने 'निराशाजनक' बताया, लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने अन्य कानूनी रास्तों (सेक्शन 232 और 301) का इस्तेमाल करते हुए नया आदेश जारी कर दिया।
150 दिनों की अवधि: यह 10% टैरिफ अगले 5 महीनों (150 दिन) के लिए प्रभावी रहेगा। इस दौरान प्रशासन इस बात की जांच करेगा कि किस देश पर कितना स्थायी टैरिफ लगाया जाना चाहिए।
शक्तियां कम नहीं होंगी: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भले ही कोर्ट ने इमरजेंसी एक्ट के तहत रोक लगाई हो, लेकिन उनके पास व्यापार को नियंत्रित करने और प्रतिबंध लगाने के अन्य कई कानूनी विकल्प मौजूद हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला: प्रशासन ने 'सेक्शन 232' (राष्ट्रीय सुरक्षा) और 'सेक्शन 301' (अनुचित व्यापार प्रथाएं) के तहत कार्रवाई की है।
टैरिफ रिफंड पर सस्पेंस: पिछले साल वसूले गए करीब 175 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व को वापस करने (रिफंड) के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि यह मामला अगले दो सालों तक कानूनी लड़ाई (मुकदमेबाजी) में रह सकता है।
सख्त चेतावनी: ट्रंप ने संकेत दिया कि जो देश अमेरिका के साथ बुरा व्यवहार कर रहे हैं, उन पर यह शुल्क भविष्य में 10% से भी अधिक बढ़ाया जा सकता है।