इस्लामाबाद : पश्चिम एशिया (West Asia) में पिछले कई हफ्तों से जारी भीषण युद्ध के बीच आज दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्ष विराम (Ceasefire) के बाद आज पहली बार दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल 'आमने-सामने' की बातचीत के लिए मेज पर बैठ रहे हैं।
इस्लामाबाद पहुंचे जेडी वेंस, ईरान ने रखीं शर्तें
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) कर रहे हैं, जो आज सुबह इस्लामाबाद पहुंचे। दूसरी ओर, ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ और अन्य अधिकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात कर चुके हैं। ईरान ने वार्ता से पहले स्पष्ट कर दिया है कि वह तभी आगे बढ़ेगा जब:
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लेबनान में इजरायल के हमले तुरंत रुकें।
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अमेरिका ईरान के जमे हुए फंड्स (Assets) को तुरंत रिलीज करे।
ट्रंप की सख्त चेतावनी- "हमें कोई खेल पसंद नहीं"
इस वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि होरमुज की खाड़ी (Strait of Hormuz), जो दुनिया के तेल व्यापार का सबसे बड़ा रास्ता है, उसे हर हाल में खुला रखा जाएगा, चाहे ईरान सहयोग करे या नहीं। ट्रंप ने उपराष्ट्रपति वेंस को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने की दिशा में एक कदम भी न बढ़ने दें।
युद्ध की विभीषिका: अब तक क्या हुआ?
बता दें कि 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए इस युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया है।
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नुकसान: ईरान और लेबनान में हजारों लोगों की मौत हुई है, जबकि इजरायल और खाड़ी देशों को भी भारी आर्थिक चोट पहुंची है।
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अर्थव्यवस्था पर असर: होरमुज की खाड़ी में तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी हुई है।
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इजरायल का रुख: इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि अगर वार्ता विफल रही, तो उनकी सेना दोबारा भीषण हमले शुरू करने के लिए तैयार है।