कोलंबो/गाले (5 मार्च, 2026): मिडिल ईस्ट की जंग अब हिंद महासागर तक फैल गई है। श्रीलंका के तट के पास एक अमेरिकी पनडुब्बी (Submarine) ने ईरान के जंगी जहाज IRIS Dena को टॉरपीडो से हमला कर समुद्र में डुबो दिया है। इस हमले में 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई है, जबकि कई अभी भी लापता हैं।
श्रीलंका के पास बढ़ा तनाव:
अब खबर आ रही है कि ईरान का एक और जंगी जहाज उसी इलाके की ओर बढ़ रहा है जहाँ पहला जहाज डूबा था। श्रीलंका सरकार ने कहा है कि वे दूसरे जहाज पर सवार करीब 100 नाविकों की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरे ईरानी जहाज ने श्रीलंकाई अधिकारियों से संपर्क कर बताया है कि उनके इंजन में खराबी आ गई है और वे मदद के लिए बंदरगाह पर आना चाहते हैं। ये जहाज भारत में एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री कार्यक्रम (Milan 2026) में हिस्सा लेकर वापस लौट रहे थे, तभी अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में अमेरिका ने इन्हें निशाना बनाया।
ईरान की कड़ी चेतावनी:
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि "अमेरिका को अपने इस कृत्य पर पछताना पड़ेगा।" उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक बड़ी आतंकी घटना करार दिया है। वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पलटवार करते हुए खाड़ी क्षेत्र में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाने का दावा किया है।
श्रीलंका में हाई अलर्ट:
श्रीलंका के गाले (Galle) शहर के अस्पतालों में घायल ईरानी नाविकों का इलाज चल रहा है। सुरक्षा इतनी कड़ी है कि अस्पताल के वार्डों को 'नो-गो ज़ोन' बना दिया गया है। श्रीलंका इस समय "आग पर चलने" जैसी स्थिति में है, क्योंकि वह इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता लेकिन जंग उसके दरवाज़े तक आ पहुँची है।