कानपुर: कानपुर की एक जिला अदालत ने शुक्रवार को एक ऐसे मामले में फैसला सुनाया है जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। मामला एक 'लेम्बोर्गिनी' कार की जब्ती और उसकी रिहाई से जुड़ा है। कोर्ट ने लगभग 12 करोड़ रुपये की इस सुपरकार को रिलीज करने के लिए मालिक को 8 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बॉन्ड भरने का आदेश दिया है।
यह लेम्बोर्गिनी कार हाल ही में एक सड़क हादसे और उसके बाद टैक्स से जुड़े दस्तावेजों की जांच के सिलसिले में पुलिस द्वारा जब्त की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि गाड़ी के कागजात और उसके आयात (Import) संबंधी दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां थीं। मामला कोर्ट में पहुंचा, जहां गाड़ी के मालिक ने इसे रिलीज करने की गुहार लगाई थी।
अदालत ने कार की कीमत और उससे जुड़े कानूनी विवाद की गंभीरता को देखते हुए यह कड़ा रुख अपनाया कोर्ट का मानना है कि यदि भविष्य में गाड़ी के दस्तावेजों से जुड़ी कोई बड़ी धोखाधड़ी साबित होती है, तो यह 8 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खजाने में जब्त कर ली जाएगी। कोर्ट ने शर्त रखी है कि गाड़ी के मालिक को मुकदमे की सुनवाई के दौरान हर तारीख पर हाजिर होना होगा और गाड़ी को कानपुर की सीमा से बाहर नहीं ले जाया जा सकेगा।
कानपुर जैसे शहर में 12 करोड़ रुपये की गाड़ी का होना ही अपने आप में बड़ी बात है, लेकिन अब 8 करोड़ के बॉन्ड की खबर ने आम लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। शहर के लोग इसे न्यायपालिका द्वारा 'अमीर और महंगे शौक' पर नकेल कसने की एक मिसाल के रूप में देख रहे हैं।
कानून के जानकारों का कहना है कि किसी भी जब्त की गई संपत्ति को रिलीज करने के लिए कोर्ट 'सुपुर्दगी' (Supurdari) की प्रक्रिया अपनाती है। इस मामले में रकम इतनी बड़ी इसलिए है क्योंकि गाड़ी की कुल वैल्यू (Market Value) और संभावित कर चोरी (Tax Evasion) का आंकड़ा बहुत अधिक है।