कौशांबी: ईरान के सर्वोच्च धार्मिक गुरु सैयद अली खामेनेई के निधन (शहादत) की खबर ने दुनिया भर के साथ-साथ कौशांबी के शिया समुदाय को भी गमगीन कर दिया है। रविवार को जिले के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर करारी कस्बे में समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
खबर फैलते ही कौशांबी के करारी, मंझनपुर, दारानगर और मुस्तफाबाद जैसे इलाकों में शोक का माहौल व्याप्त हो गया। उत्तर वर्ल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इन आयोजनों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार रहीं श्रद्धांजलि सभाओं में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हुए, गम और विरोध के प्रतीक स्वरूप लोगों ने काले कपड़े पहने थे और हाथों में तख्तियां लेकर अपने 'रहबर' (नेता) को याद किया और पवित्र माह के चलते बड़ी संख्या में लोग रोजे की हालत में थे, इसके बावजूद उन्होंने कड़ी धूप और गर्मी के बीच घंटों तक मजलिस और मातम के कार्यक्रमों में शिरकत की।
श्रद्धांजलि सभाओं के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी भी व्यक्त की। इस दौरान अमेरिका और इज़राइल की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लोगों का आरोप था कि यह घटना वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपजे इस तनाव का असर स्थानीय स्तर पर न बिगड़े, इसके लिए कौशांबी पुलिस और प्रशासनिक टीमें पूरी तरह मुस्तैद रहीं।
प्रशासन ने पहले ही मजलिस और मातम को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। करारी कस्बे में एहतियात के तौर पर कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें स्थिति सामान्य होने पर बाद में छोड़ दिया गया। फिलहाल जिले में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में और सामान्य है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया और भीड़-भाड़ वाले इलाकों पर पैनी नजर रख रही हैं।
हम अपने सभी पाठकों से अपील करते हैं कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और जिले में आपसी भाईचारा व शांति व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।