लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojana) के तहत मुफ्त इलाज के नाम पर धांधली करने वाले अस्पतालों और जालसाजों पर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की पैनी नज़र होगी। सरकार ने फर्जी क्लेम के जरिए सरकारी धन की चपत लगाने वालों को पकड़ने के लिए अब तकनीकी का सहारा लेने का फैसला किया है।
अब तक आयुष्मान योजना के दावों (Claims) की जांच मैन्युअल तरीके से होती थी, जिसमें समय ज़्यादा लगता था और गड़बड़ी की गुंजाइश रहती थी। लेकिन अब AI सिस्टम उन अस्पतालों के डेटा का विश्लेषण करेगा जहाँ संदिग्ध रूप से बहुत ज़्यादा क्लेम आ रहे हैं। अगर कोई अस्पताल बिना भर्ती किए या बिना इलाज के बिल भेजता है, तो AI के एल्गोरिदम तुरंत उस गड़बड़ी को पकड़ लेंगे। जांच के बाद AI एक फाइनल रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसके आधार पर दोषी अस्पतालों का पैनल रद्द किया जाएगा और उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
हाल के दिनों में कई ऐसी शिकायतें आई थीं जहाँ अस्पतालों ने मरीज़ों के डिस्चार्ज होने के बाद भी उनके कार्ड का गलत इस्तेमाल किया या मामूली बीमारी को बड़ा बताकर सरकार से पैसे ऐंठने की कोशिश की। इसी फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए लखनऊ मुख्यालय से इस नई व्यवस्था की निगरानी की जा रही है।
इस कदम से योजना में पारदर्शिता आएगी और पात्र लोगों को इलाज मिलने में आसानी होगी। सरकारी बजट का सही इस्तेमाल होगा, जिससे भविष्य में और अधिक लोगों को इस योजना के दायरे में लाया जा सकेगा।