लखनऊ: नवाबों के शहर लखनऊ के मशहूर खान-पान के ठिकानों पर इन दिनों एक नया संकट खड़ा हो गया है। शहर में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी किल्लत के चलते 'टुंडे कबाबी' और 'शर्मा जी की चाय' जैसे बड़े नाम अब मजबूरन पुराने दौर की तरफ लौट रहे हैं। गैस न मिलने की वजह से इन दुकानों पर अब कोयले और लकड़ी की भट्टियों का इस्तेमाल शुरू हो गया है।
लखनऊ के अमीनाबाद और चौक इलाके में स्थित टुंडे कबाबी के आउटलेट्स पर ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। संचालकों का कहना है कि गैस की सप्लाई बाधित होने से कबाबों को तैयार करने में मुश्किल आ रही है। यही हाल हजरतगंज की मशहूर 'शर्मा जी की चाय' का भी है, जहां अब चाय बनाने के लिए कोयले की अंगीठियों का सहारा लिया जा रहा है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि कोयले की आंच पर खाना पकने से समय ज्यादा लग रहा है, जिससे ग्राहकों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
गैस एजेंसियों का कहना है कि पीछे से ही सप्लाई चेन में कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण कमर्शियल सिलेंडरों की कमी हुई है। इस किल्लत ने न सिर्फ इन बड़े आउटलेट्स को बल्कि शहर के सैकड़ों छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट्स को भी प्रभावित किया है। कई जगह तो गैस न होने की वजह से मेन्यू में भी कटौती कर दी गई है।
उत्तर वर्ल्ड (Uttar World) की पड़ताल में सामने आया कि अगर अगले 2-3 दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो शहर के स्ट्रीट फूड बिजनेस पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है। खाने-पीने के शौकीन लोग इस बदलाव से थोड़े हैरान हैं, हालांकि कुछ का कहना है कि कोयले की आंच पर बने खाने का स्वाद और भी लाजवाब होता है। लखनऊ की ताज़ा खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।