लखनऊ : राजधानी लखनऊ को चकाचक बनाने के लिए नगर निगम ने कमर कस ली है। शहर के सभी जोन में बनाए गए 16 मॉडल वॉर्डों में साफ-सफाई और कूड़ा कलेक्शन की हकीकत जानने के लिए अब 'क्रॉस चेकिंग' शुरू होने वाली है। जोनल अधिकारी दावा कर रहे हैं कि इन वॉर्डों में 90 फीसदी से ज्यादा कूड़ा उठ रहा है, लेकिन नगर निगम अब इस दावे की पोल खोलने के लिए दूसरी टीमें मैदान में उतारेगा।
कैसे होगी 'दावे' की अग्निपरीक्षा? नगर आयुक्त गौरव कुमार के निर्देश पर अब इलाकेवार रिपोर्ट ली जाएगी। टीमें गली-गली जाकर देखेंगी कि वाकई कूड़ा उठ रहा है या सिर्फ कागजों पर सफाई हो रही है। इतना ही नहीं, नगर निगम अब सीधे जनता को 'रैंडम कॉल' करेगा। फोन घुमाकर पूछा जाएगा— "क्या आपके यहाँ सफाई वाला आया? क्या गली साफ है?"
पूरे लखनऊ में लागू होगा 'सक्सेस मॉडल': इन 16 वॉर्डों (हर जोन से दो) को इस तरह तैयार किया जा रहा है जहाँ खुले में शौच (ODF) पूरी तरह बंद हो। खाली प्लॉटों में गंदगी का नामोनिशान न हो। सीवर ओवरफ्लो, टूटी सड़कें और नालियों की समस्या जड़ से खत्म हो। अगर यहाँ यह प्रयोग सफल रहा, तो फरवरी में इसकी औपचारिक घोषणा के बाद इसे पूरे शहर में लागू किया जाएगा।
सदन में मचा शोर: 'अफसरों के दावे और हकीकत में फर्क' एक तरफ अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्षदों ने अव्यवस्थाओं का मुद्दा उठाकर घेराबंदी शुरू कर दी है। पार्षद मनीष कुमार रस्तोगी ने सदन में अपनी व्यथा सुनाई आचार्य नरेंद्र देव वॉर्ड में 112 सफाई कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन काम सिर्फ 62 ही कर रहे हैं। जलकल विभाग ने सड़कें खोद डालीं, लेकिन उन्हें दोबारा बनाना भूल गए। शिकायत के बावजूद कोई सुनने वाला नहीं है।
उत्तर वर्ल्ड की नजर: क्या फरवरी तक लखनऊ वाकई 'मॉडल सिटी' की राह पर बढ़ पाएगा या पार्षदों की उठाई गई कमियां इस योजना पर पानी फेर देंगी?