लखनऊ: लखनऊ यूनिवर्सिटी के एक गर्ल्स हॉस्टल में मेस के खाने की गुणवत्ता को लेकर हुई शिकायत ने एक नया और हैरान कर देने वाला मोड़ ले लिया है। मेस के खाने में खराबी और साफ-सफाई की कमी का आरोप लगाने वाली छात्राओं का मामला जब प्रशासन के सामने पहुँचा, तो हकीकत कुछ और ही निकली।
क्या है पूरा मामला?
हॉस्टल की कुछ छात्राओं ने मेस के खाने की गुणवत्ता (Quality) पर सवाल उठाते हुए वार्डन से शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि मेस का खाना न तो स्वादिष्ट है और न ही हाइजेनिक। जब प्रशासन और हॉस्टल वार्डन ने मामले की जांच शुरू की और मेस ऑपरेटर से बात की, तो पता चला कि विवाद का कारण कुछ और ही था।
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जांच में खुलासा: मेस के कर्मचारियों ने बताया कि शिकायत करने वाली कुछ छात्राओं ने इसलिए मेस का खाना नहीं खाया था क्योंकि उनके 'बॉयफ्रेंड' ने उन्हें बाहर का खाना खिलाने की जिद की थी या किसी आपसी मनमुटाव के चलते उन्होंने मेस का खाना बॉयकॉट किया था।
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प्रशासन की नाराजगी: हॉस्टल वार्डन का कहना है कि खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत करना छात्राओं का अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत कारणों को 'हॉस्टल मैनेजमेंट' की समस्या बताकर पेश करना अनुशासनहीनता के दायरे में आता है।
छात्र राजनीति और प्रशासन में तकरार
इस खुलासे के बाद लखनऊ यूनिवर्सिटी में बहस छिड़ गई है:
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छात्र संगठनों का रुख: कुछ छात्र संगठनों का आरोप है कि प्रशासन छात्राओं की निजी जिंदगी (Personal Life) में दखल देकर उनकी शिकायतों को दबाने की कोशिश कर रहा है।
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प्रशासन का पक्ष: प्रशासन का कहना है कि उनका एकमात्र उद्देश्य मेस की व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना है और मेस जैसे सार्वजनिक स्थान पर निजी कारणों से माहौल खराब करना गलत है।
निष्कर्ष
यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ शिक्षकों का मानना है कि खाने की गुणवत्ता की जांच तो होनी ही चाहिए, लेकिन शिकायतों को दर्ज करते समय गंभीरता और ईमानदारी का पालन करना भी छात्राओं की जिम्मेदारी है।