लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख जिलों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत और पंपों पर मची अफरा-तफरी की खबरें आ रही हैं। बुधवार रात से शुरू हुआ यह 'पैनिक' गुरुवार को पूरे प्रदेश में फैल गया है। लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, मेरठ, और यहाँ तक कि बहराइच जैसे जिलों में भी पेट्रोल पंपों पर 1-1 किलोमीटर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। लोग अपनी गाड़ियाँ छोड़कर पैदल या साइकिल से तेल लेने पहुँच रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती नज़र आ रही है।
अफवाहों का बाज़ार गर्म: क्यों मची है भगदड़?
इस पूरे संकट की जड़ में सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ भ्रामक खबरें हैं। दावा किया जा रहा है कि ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते युद्ध के कारण भारत में तेल का आयात बंद हो गया है और अगले 48 घंटों में पूरे देश में पेट्रोल-डीजल मिलना बंद हो जाएगा। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों ने इसे सिरे से नकारा है, लेकिन जनता में डर इतना बैठ गया है कि हर कोई अपनी टंकी फुल कराने के लिए घर से निकल पड़ा है।
यूपी के प्रमुख जिलों का हाल (Ground Report)
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लखनऊ: राजधानी के 200 से अधिक पेट्रोल पंपों पर सुबह से ही तेल खत्म होने के बोर्ड लग गए हैं। गोमती नगर और हजरतगंज जैसे इलाकों में भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा है।
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कानपुर: औद्योगिक नगरी कानपुर में ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल की चेतावनी दी है, जिससे डर और बढ़ गया है। यहाँ डीजल की मांग में 400% का उछाल आया है।
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बहराइच और तराई क्षेत्र: नेपाल सीमा से सटे जिलों में भी भारी भीड़ उमड़ी है। लोग गैलन और बोतलों में तेल भरने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे प्रशासन ने प्रतिबंधित कर दिया है।
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मेरठ और पश्चिम यूपी: दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित पंपों पर वाहनों की कतारों की वजह से जाम की स्थिति बनी हुई है।
प्रशासन का कड़ा रुख: "तेल की कमी नहीं, पैनिक बाइंग है समस्या"
उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बयान जारी कर कहा है कि डिपो से सप्लाई निरंतर जारी है। समस्या तेल की कमी नहीं, बल्कि अचानक बढ़ी हुई मांग है। एक सामान्य दिन में जितना तेल 24 घंटे में बिकता था, उतना अब मात्र 3-4 घंटे में खत्म हो रहा है। टैंकरों को डिपो से पंप तक पहुँचने और रिफिलिंग करने में समय लग रहा है, जिसे लोग 'स्टॉक खत्म होना' समझ रहे हैं।
राशनिंग लागू: 1 लीटर से ज़्यादा तेल नहीं!
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई जिलों के जिलाधिकारियों (DM) ने पेट्रोल पंपों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं:
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लिमिट तय: दोपहिया वाहनों को ₹200 और चार पहिया वाहनों को ₹500 से ₹1000 तक का ही तेल दिया जा रहा है।
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बोतलों पर बैन: खुले में या बोतलों में पेट्रोल देना अब अपराध की श्रेणी में आएगा।
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पुलिस सुरक्षा: हर बड़े पंप पर दो सिपाही तैनात रहेंगे ताकि मारपीट या विवाद न हो।
निष्कर्ष: जनता को क्या करना चाहिए?
सरकार ने अपील की है कि लोग धैर्य रखें। तेल का पर्याप्त बफर स्टॉक सुरक्षित है। केवल अफवाहों के आधार पर पैनिक क्रिएट करने से सप्लाई चेन और भी खराब हो जाएगी। अगर आप बहुत ज़रूरी न हो, तो अभी पेट्रोल पंपों पर जाने से बचें।