नए महीने की शुरुआत के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने न केवल खाड़ी देशों की शांति भंग की है, बल्कि दुनिया भर के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट को हिला कर रख दिया है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल है, और 'सेफ हेवन' (Safe Haven) यानी सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की मांग अचानक बढ़ गई है।
1. कच्चा तेल: अनिश्चितता का केंद्र
वैश्विक बाजारों में सबसे बड़ी हलचल क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) को लेकर है। ईरान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'होरमुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के पास होने के कारण, किसी भी संघर्ष का सीधा असर तेल की सप्लाई पर पड़ता है।
कीमतों में उछाल: संघर्ष की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) की कीमतों में तेजी देखी गई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के स्तर को पार कर सकती हैं और लंबे समय तक युद्ध खिंचा तो यह $100 तक भी पहुँच सकता है।
यूएई में ईंधन महंगा: इस तनाव का असर स्थानीय बाजारों पर दिखने लगा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मार्च 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी है, जो सीधे तौर पर बढ़ते ग्लोबल रिस्क प्रीमियम को दर्शाती है।
2. शेयर बाजारों की स्थिति: घबराहट और गिरावट
शुक्रवार (27 फरवरी) को अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली देखी गई, जिसका असर सोमवार सुबह एशियाई बाजारों पर पड़ने की पूरी आशंका है।
वोलैटिलिटी (Volatility) का दौर: 'VIX' (Volatility Index) में 2026 की शुरुआत से ही लगभग एक-तिहाई की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसका मतलब है कि बाजार में बड़े झटके आने की संभावना बढ़ गई है।
भारतीय बाजार पर असर: निफ्टी और सेंसेक्स पहले ही दबाव में हैं। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि सोमवार को भारतीय बाजारों में 'गैप-डाउन' ओपनिंग हो सकती है। ऊर्जा (Energy), विमानन (Aviation), और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के शेयरों पर दबाव रहने की संभावना है, जबकि डिफेंस और फार्मास्युटिकल सेक्टर में स्थिरता देखी जा सकती है।
3. सुरक्षित निवेश की ओर दौड़
जब भी भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, निवेशक जोखिम भरे शेयरों से पैसे निकालकर 'सुरक्षित' जगहों पर लगाते हैं।
सोना (Gold): सोने को हमेशा से संकट का साथी माना गया है। COMEX पर सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और निवेश का प्रवाह लगातार सोने और चांदी की ओर बढ़ रहा है।
मुद्रा (Currency): भू-राजनीतिक तनाव के चलते अमेरिकी डॉलर मजबूत होने की संभावना है, जबकि उभरते बाजारों की मुद्राओं (Emerging Market Currencies) पर दबाव बढ़ सकता है। ईरानी रियाल (Rial) में पहले ही भारी गिरावट देखी जा चुकी है।
4. क्या यह मंदी (Recession) की आहट है?
अर्थशास्त्री इस बात पर बंटे हुए हैं कि क्या यह संघर्ष वैश्विक मंदी ला सकता है। जेपी मॉर्गन और अन्य बड़े संस्थानों का मानना है कि 2026 के लिए वैश्विक विकास का दृष्टिकोण 'नाज़ुक' है।
मुद्रास्फीति (Inflation): तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में महंगाई को फिर से हवा दे सकती हैं। इससे केंद्रीय बैंकों (जैसे फेडरल रिजर्व) के लिए ब्याज दरों में कटौती का फैसला लेना और मुश्किल हो जाएगा।
सप्लाई चेन का संकट: कई बड़ी कंपनियों ने होरमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से शिपमेंट को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार की गति धीमी होने का खतरा है।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी 'घबराहट में बिकवाली' (Panic Selling) न करें। मौजूदा स्थिति अस्थिर है, और यदि संघर्ष नियंत्रित हो जाता है, तो बाजार में तेजी से सुधार (Bounce back) भी हो सकता है। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता रखनी चाहिए और लंबी अवधि के नजरिए से ही निवेश करना चाहिए।