नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब सिर्फ सरहदों तक सीमित नहीं रही, इसका असर अब भारतीय रसोई के बजट पर भी दिखने वाला है। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) गैस की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।
क्यों बढ़ सकते हैं सिलेंडर के दाम?
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का खतरा: भारत अपनी ज़रूरत का 90% तेल और गैस विदेशों से मंगाता है। इसका एक बड़ा हिस्सा 'होर्मुज' नाम के समुद्री रास्ते से आता है। अगर जंग की वजह से यह रास्ता बंद हुआ, तो सप्लाई रुक जाएगी और कीमतें आसमान छूने लगेंगी।
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शिपिंग और इंश्योरेंस का खर्च: युद्ध वाले इलाकों से गुज़रने वाले जहाजों का किराया और इंश्योरेंस बहुत महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर गैस सिलेंडर (LPG) और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है।
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ग्लोबल मार्केट में हलचल: जैसे ही युद्ध की खबरें तेज़ हुई हैं, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के भाव बढ़ने शुरू हो गए हैं। चूंकि LPG की कीमतें भी कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं, इसलिए रसोई गैस महंगी होने का खतरा बढ़ गया है।
क्या कहती है भारत सरकार?
हालांकि सरकार ने अभी राहत भरा बयान दिया है कि हमारे पास पर्याप्त स्टॉक है और तुरंत कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी, लेकिन अगर युद्ध लंबा खिंचा, तो सरकार के लिए भी सब्सिडी का बोझ संभालना मुश्किल होगा और कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
आम जनता के लिए क्या है "अलर्ट"?
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महंगाई का खतरा: अगर तेल और गैस महंगी हुई, तो माल ढुलाई महंगी होगी जिससे फल, सब्जी और अनाज के दाम भी बढ़ सकते हैं।
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बजट पर असर: मध्यम वर्गीय परिवारों को अपनी सेविंग्स और महीने के खर्चों को लेकर सतर्क रहने की ज़रूरत है।