नई दिल्ली : मिडिल ईस्ट में सुलगती जंग की आग अब सीधे भारतीय रसोई के चूल्हों तक पहुँच चुकी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध के 12वें दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। इसका सबसे बड़ा और तत्काल प्रभाव भारत में LPG की भारी किल्लत के रूप में देखने को मिल रहा है। स्थिति यह है कि देश के महानगरों से लेकर छोटे कस्बों तक में रसोई गैस की बुकिंग के नियमों में कड़े बदलाव किए गए हैं, जिससे जनता के बीच पैनिक बाइंग शुरू हो गई है।
जैसे ही यह खबर फैली कि अब दूसरा सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा, भारतीय उपभोक्ताओं ने तत्काल विकल्प तलाशना शुरू कर दिया। इस होड़ में इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकटॉप सबसे बड़ी राहत बनकर उभरा है। ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon और Croma की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले महज 48 घंटों में इंडक्शन कुकर की बिक्री में 3000% (30 गुना) की अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है।
क्रोमा और रिलायंस डिजिटल जैसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर्स पर सुबह से ही लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु में तो हालात ऐसे हैं कि स्टॉक खत्म होने के कारण स्टोर्स के बाहर 'आउट ऑफ स्टॉक' (Out of Stock) के बोर्ड लटका दिए गए हैं। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे Blinkit और Zepto, जो 10 मिनट में सामान पहुंचाने का दावा करते हैं, वहां भी इंडक्शन चूल्हे अब 'नोटिफाई मी' की कैटेगरी में चले गए हैं।
युद्ध के कारण सप्लाई चेन पर पड़े दबाव को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने नई गाइडलाइन्स जारी की हैं। अब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 25 दिन का लॉक-इन पीरियड लागू कर दिया गया है। यानी अगर आपको आज सिलेंडर मिला है, तो आप अगले 25 दिनों तक दोबारा बुकिंग नहीं कर पाएंगे। इसका उद्देश्य जमाखोरी (Hoarding) को रोकना और मौजूदा स्टॉक को समान रूप से वितरित करना है। हालांकि, इस फैसले ने शादियों और त्योहारों के सीजन में आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई लगभग 70% तक कम कर दी गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री बंद होने की कगार पर है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल और गैस गुजरता है, वहां युद्ध के कारण ट्रैफिक 90% तक कम हो गया है। ईरान ने इस रास्ते को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में आपूर्ति ठप होने की आशंका ने बाजार में दहशत पैदा कर दी है।
सिर्फ इंडक्शन ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक राइस कुकर, एयर फ्रायर और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की मांग में भी 400% का इजाफा हुआ है। लोगों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा और गैस की कीमतें 2000 रुपये के पार चली गईं, तो बिजली से खाना पकाना ही एकमात्र सस्ता और सुलभ रास्ता बचेगा।
संकट के इस दौर में कालाबाजारी (Black Marketing) भी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों से खबरें आ रही हैं कि 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर ब्लैक में 1800 से 2200 रुपये तक में बिक रहा है। वहीं, इंडक्शन कुकर जो पहले 2500 रुपये में आसानी से मिल जाते थे, अब रिटेल दुकानों पर 4000 से 5000 रुपये की मनमानी कीमतों पर बेचे जा रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अस्थाई हो सकता है बशर्ते युद्ध विराम की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाए। हालांकि, उपभोक्ताओं का व्यवहार बदल रहा है। अब लोग 'हाइब्रिड किचन' की ओर बढ़ रहे हैं, जहां गैस के साथ-साथ इलेक्ट्रिक कुकिंग का विकल्प भी मौजूद हो। सरकार ने फिलहाल लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में स्टॉक न करें, क्योंकि देश में एलपीजी का पर्याप्त रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves) मौजूद है।
निष्कर्ष: ईरान-इजरायल युद्ध ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रसोई गैस का संकट केवल एक ईंधन की कमी नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली का संकेत है। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनियां इंडक्शन कुकर की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नया स्टॉक बाजार में उतार पाती हैं या जनता को फिर से कोयले और लकड़ी के पुराने दौर की ओर मुड़ना पड़ेगा।