ईरान पर हमलों के बाद कतर एनर्जी ने रोका दुनिया का सबसे बड़ा गैस उत्पादन। भारत में CNG और बिजली महंगी होने का खतरा। पढ़ें ग्लोबल एनर्जी संकट की पूरी रिपोर्ट उत्तर वर्ल्ड पर।
दोहा : Middle East में छिड़ी जंग ने अब वैश्विक अर्थव्यवस्था की नब्ज पर हमला किया है। दुनिया की सबसे बड़ी लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) उत्पादक कंपनी 'QatarEnergy' ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपने उत्पादन को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हालिया भीषण हमलों और उसके बाद ईरान द्वारा खाड़ी देशों में जवाबी कार्रवाई की धमकी के बाद लिया गया है। UttarWorld की इस विशेष रिपोर्ट में समझिए इस संकट का भारत और दुनिया पर क्या असर होगा।
ईरान पर हुए हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): कतर की गैस इसी समुद्री रास्ते से दुनिया भर में जाती है। ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की चेतावनी दी है। कतर के गैस फील्ड्स और जहाजों पर मिसाइल हमलों की आशंका को देखते हुए कतर ने उत्पादन और शिपमेंट को 'हॉल्ट' (Halt) पर डाल दिया है। कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक है। उत्पादन रुकने से यूरोप और एशिया में गैस की कीमतों में 15% से 20% तक का तत्काल उछाल आ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर निर्भर है। कतर के पीछे हटने से यूरोप में बिजली और हीटिंग का संकट खड़ा हो जाएगा।
भारत अपनी जरूरत की करीब 40% से 50% LNG कतर से आयात करता है। भारत में बिजली संयंत्रों और उर्वरक (Fertilizer) फैक्ट्रियों में कतर की गैस इस्तेमाल होती है। उत्पादन रुकने से खेती की लागत और बिजली के दाम बढ़ सकते हैं। घरों में आने वाली गैस (PNG) और गाड़ियों की CNG की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोत्तरी होने की आशंका है।
कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "हम अपने कर्मचारियों और संपत्तियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं कर सकते। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, हम फिर से काम शुरू करेंगे।" वर्तमान में कंपनी ने 'फोर्स मेजर' (Force Majeure) लागू करने के संकेत दिए हैं, जिसका मतलब है कि वे अब तय समझौतों के तहत गैस सप्लाई करने की कानूनी गारंटी नहीं दे सकते।
अगर यह तनाव अगले 10 दिनों तक और चला, तो दुनिया को 1970 के दशक जैसे तेल और गैस संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत सरकार को अब अपने रणनीतिक गैस भंडार (Strategic Gas Reserves) और वैकल्पिक स्रोतों पर तेजी से काम करना होगा।