नई दिल्ली/चेन्नई: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में वोटर लिस्ट की सफाई को लेकर चल रही खींचतान के बीच एक बहुत बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने चुनाव आयोग को साफ शब्दों में कहा है कि वोटर लिस्ट में जिन 1.16 करोड़ लोगों के डेटा में गलतियाँ या 'लॉजिकल कमियाँ' पाई गई हैं, उनकी पूरी जानकारी छिपानी नहीं चाहिए। कोर्ट का मानना है कि अगर किसी की उम्र या रिश्तों को लेकर डेटा में कोई शक है, तो इसकी सूची हर ग्राम पंचायत और वार्ड के सार्वजनिक स्थानों पर लगाई जाए। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि आम जनता को पता चल सके कि किसका नाम लिस्ट से कटने वाला है या किस पर सवाल उठा है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
इस मामले की गहराई में जाएँ तो कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुराने फॉर्मूले को तमिलनाडु में भी लागू करने का निर्देश दिया है। अब जिन लोगों के डेटा पर चुनाव आयोग को आपत्ति है, उन्हें अपनी बात रखने और सही दस्तावेज दिखाने के लिए 10 दिन की मोहलत दी गई है। लोग सीधे या अपने बूथ लेवल एजेंट के जरिए अपनी सफाई पेश कर सकेंगे। दिलचस्प बात यह है कि जिन गलतियों की बात हो रही है, उनमें माता-पिता और बच्चों की उम्र का बेमेल होना या एक ही घर में बहुत ज्यादा सदस्य होने जैसे तकनीकी कारण शामिल हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को भी फटकार लगाते हुए कहा है कि इस काम के लिए चुनाव आयोग को जरूरी कर्मचारी और सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि चुनाव से पहले लिस्ट एकदम सही हो सके।