नई दिल्ली। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी एक बार फिर कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ ₹2,220 करोड़ की धोखाधड़ी का नया मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के तहत सीबीआई ने गुरुवार को अनिल अंबानी के आवास और रिलायंस के दफ्तरों पर छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं।
लोन का पैसा अपनी ही कंपनियों में डाइवर्ट करने का आरोप
सीबीआई की प्राथमिकी (FIR) के अनुसार, अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और देना बैंक से लोन लिया था। आरोप है कि इस पैसे का इस्तेमाल व्यावसायिक कार्यों के बजाय फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर अपनी ही अन्य जुड़ी हुई कंपनियों (Related Parties) में डाइवर्ट कर दिया गया। बैंक की फॉरेंसिक जांच में यह हेरफेर पकड़ी गई है।
हाईकोर्ट से स्टे हटते ही एक्शन में आई सीबीआई
अनिल अंबानी की कंपनी का यह खाता 2017 में ही एनपीए (NPA) घोषित हो चुका था। हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस खाते को 'फ्रॉड' घोषित करने पर रोक लगा रखी थी। 23 फरवरी 2026 को यह स्टे हटते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने शिकायत दर्ज कराई, जिस पर सीबीआई ने तुरंत एक्शन लिया।
एक ही दिन में दोहरी मार: ईडी के सामने भी हुए पेश
सीबीआई की छापेमारी के बीच अनिल अंबानी गुरुवार को ही एक अन्य मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर पहुंचे। ईडी उनसे रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा किए गए ₹40,000 करोड़ से अधिक के कथित बैंक कर्ज और फर्जीवाड़े को लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी उनसे लंबी पूछताछ हुई थी।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे
शिकायत के अनुसार, रिलायंस ग्रुप की कंपनियों ने विभिन्न बैंकों से करीब ₹31,580 करोड़ जुटाए थे। इसमें से बड़ा हिस्सा दूसरी कंपनियों को ट्रांसफर करने और फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश कर तुरंत निकाल लेने के आरोप हैं, जो लोन की शर्तों का सीधा उल्लंघन है।