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भारत और कनाडा के बीच 'नए युग' की शुरुआत: पीएम मार्क कार्नी की महत्वपूर्ण यात्रा से बढ़ेंगी रणनीतिक और आर्थिक दूरियां

By Uttar World Desk

01 मा, 2026 | 06:51 बजे
भारत और कनाडा के बीच 'नए युग' की शुरुआत: पीएम मार्क कार्नी की महत्वपूर्ण यात्रा से बढ़ेंगी रणनीतिक और आर्थिक दूरियां

नई दिल्ली : कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा को कूटनीतिक हलकों में बेहद 'महत्वपूर्ण' माना जा रहा है। अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच, कार्नी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को 'रीसेट' (Reset) करने और आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में आई खटास को दूर करना कार्नी की पहली प्राथमिकता है। 2023 के राजनयिक विवाद के बाद, पिछले साल जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी की मुलाकात ने संबंधों में बर्फ पिघलाने का काम किया था। अब, यह यात्रा उस दोस्ती को एक ठोस आर्थिक स्वरूप देने के लिए है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें ऊर्जा और आधुनिक तकनीक पर बड़े ऐलान होने की संभावना है:

पेट्रोलियम और गैस: कनाडा, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक है, भारत को एक बड़े और स्थिर बाजार के रूप में देख रहा है।

यूरेनियम और परमाणु ऊर्जा: कनाडा भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। दोनों देशों के बीच 2.8 अरब डॉलर का 10 साल का डील फाइनल होने के कगार पर है। इसके अलावा, 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' (SMR) पर भी बातचीत होने की उम्मीद है।

क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals): भविष्य की तकनीक (जैसे EV बैटरी और चिप्स) के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर दोनों पक्ष काम कर रहे हैं।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब कनाडा पर अमेरिका का व्यापारिक दबाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और कनाडा पर लगाए गए नए टैरिफ ने कार्नी को विवश कर दिया है कि वे अमेरिका के विकल्प के तौर पर भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ नए गठबंधन तैयार करें। कार्नी ने हाल ही में दावोस में 'मिडल-पावर डिप्लोमेसी' का विजन पेश किया था, जो इसी रणनीति का हिस्सा है।

भारत, जिसे अपनी तेजी से बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के लिए सुरक्षित और सस्ती आपूर्ति की तलाश है, कनाडा के साथ इस समझौते को एक 'रणनीतिक निर्णय' के रूप में देख रहा है। हालांकि, भारतीय बाजार 'कीमत के प्रति संवेदनशील' (Price Sensitive) है, इसलिए भारत सरकार ऐसी डील की तलाश में है जो दोनों देशों के हितों के साथ-साथ किफायती भी हो।

मार्क कार्नी की यह भारत यात्रा आने वाले वर्षों में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करेगी। यदि भारत और कनाडा अपने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़कर आर्थिक साझेदारी पर मुहर लगाते हैं, तो यह न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की भू-राजनीति के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

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