उत्तर वर्ल्ड न्यूज़ डेस्क | चेन्नई 4 मार्च : दक्षिण भारत की राजनीति का केंद्र माने जाने वाले तमिलनाडु में चुनावी बिगुल बज चुका है। साल 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने अपनी बिसात बिछा दी है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK ने न केवल अपने पुराने साथियों को साथ रखा है, बल्कि 21 पार्टियों का एक ऐसा विशाल कुनबा तैयार किया है जो विपक्षी खेमे में खलबली मचाने के लिए काफी है। इस गठबंधन की सबसे बड़ी खबर कांग्रेस के साथ हुए सीट शेयरिंग समझौते को लेकर है, जिसने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है।
DMK-कांग्रेस गठबंधन: 28 सीटों का समीकरण
चेन्नई में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. सेल्वापेरुन्थागाई के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद सीटों के बंटवारे पर अंतिम मुहर लग गई है। समझौते के तहत कांग्रेस इस बार तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में से 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा को लेकर भी बड़ा दांव खेला गया है। कांग्रेस को गठबंधन के तहत एक राज्यसभा सीट भी दी गई है। यह समझौता दिखाता है कि DMK अपने सबसे बड़े राष्ट्रीय सहयोगी कांग्रेस को नाराज नहीं करना चाहती, भले ही गठबंधन में 21 अन्य दल भी शामिल हों।
मुख्यमंत्री स्टालिन का 'अजेय' गठबंधन
तमिलनाडु की राजनीति का एक पुराना इतिहास रहा है कि यहाँ चुनाव दर चुनाव गठबंधन बदलते रहे हैं। लेकिन एम.के. स्टालिन ने इस परंपरा को तोड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। DMK के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह राज्य के इतिहास में पहली बार है कि एक ही गठबंधन बिना किसी बड़ी टूट-फूट के लगातार चौथी बार चुनाव का सामना कर रहा है।
स्टालिन ने अपनी सौम्य छवि और सभी दलों को साथ लेकर चलने की कला से इस गठबंधन को 'फेविकोल' की तरह जोड़कर रखा है। जहाँ विपक्षी दल पिछले दो सालों से गठबंधन टूटने की दुआएं मांग रहे थे, वहीं स्टालिन ने नए दलों को शामिल कर अपने मोर्चे को और अधिक मजबूत कर लिया है।
राज्यसभा चुनाव: किसे मिला मौका?
सीट शेयरिंग के साथ-साथ DMK ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों के नामों का भी ऐलान कर दिया है।
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तिरुचि शिवा: पार्टी ने अपने पुराने दिग्गज और अनुभवी नेता तिरुचि शिवा पर एक बार फिर भरोसा जताया है।
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कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन: इन्हें पहली बार राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया गया है, जो पार्टी के कैडर के लिए एक उत्साहजनक संदेश है। गठबंधन के तहत कुल राज्यसभा सीटों में से DMK को 2, कांग्रेस को 1 और DMDK को 1 सीट दी गई है।
विपक्ष की चुनौती और स्टालिन का पलटवार
विपक्ष, विशेष रूप से एआईएडीएमके (AIADMK) के नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर हमला करते हुए DMK ने कहा है कि विपक्ष पिछले कई महीनों से गठबंधन के बिखरने की भविष्यवाणी कर रहा था। DMK ने तंज कसा कि "कल के दिल्ली इंटरव्यू तक पलानीस्वामी गठबंधन टूटने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन अंत में वे अकेले रह गए।"
यही नहीं, अभिनेता से नेता बने विजय की नई पार्टी भी इस बार मैदान में है, जिसने स्टालिन पर हमला करते हुए कहा था कि "DMK सिर्फ चुनावी गठबंधन की राजनीति करती है।" लेकिन स्टालिन का यह 21 दलों का मोर्चा दिखाता है कि वह किसी भी नई चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
पन्नीरसेल्वम की एंट्री से बढ़ा वजन
इस चुनाव की एक और बड़ी हलचल पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) का DMK खेमे में शामिल होना है। AIADMK से अलग होने के बाद OPS का DMK के साथ आना यह संकेत देता है कि तमिलनाडु की राजनीति अब 'स्टालिन बनाम अन्य' के मोड़ पर आ गई है। OPS ने दावा किया है कि AIADMK अब कभी चुनाव नहीं जीत पाएगी, जिससे विपक्षी खेमे का मनोबल काफी गिरा है।
निष्कर्ष: क्या फिर खिलेगा 'सूरज'?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 केवल सत्ता का चुनाव नहीं है, बल्कि यह स्टालिन के नेतृत्व की परीक्षा भी है। 21 दलों का यह विशाल गठबंधन एक तरफ जहाँ अटूट दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ सीटों के कम होने से कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष की संभावना भी बनी रहती है। लेकिन फिलहाल, 'उगते सूरज' (DMK का चुनाव चिन्ह) की चमक तेज दिखाई दे रही है।
कांग्रेस के लिए 28 सीटें और एक राज्यसभा सीट एक सम्मानजनक समझौता माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या यह 'महागठबंधन' जनता के बीच उसी मजबूती से उतर पाएगा जिस मजबूती से वह कागजों पर दिख रहा है।