NEW DELHI | भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) को अंतिम रूप दिया है, जो वैश्विक व्यापार के परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इस समझौते के तहत सौ से ज़्यादा उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ हटाए या कम किए जाएंगे, जिससे भारत और यूरोप के बीच व्यापार को तेज़ी से बढ़ावा मिलेगा। यह डील लगभग 96.6% व्यापार-मूल्य वाले सामानों पर शुल्क में कटौती करेगी, जिससे यूरोपीय कंपनियों को भारत में अपने उत्पादों के लिए आसान बाज़ार मिल सकेगा और भारतीय निर्यातकों के लिए भी यूरोपीय Union के 27 देशों में प्रवेश सुगम होगा।
इस समझौते के ऐलान के समय यह भी स्पष्ट हुआ कि यह कदम इस साल की शुरुआत से अमेरिका के हाल के उच्च टैरिफ (Trump tariffs) की नीतियों के बीच आया है, जिसने भारत और कई अन्य देशों पर भारी आयात शुल्क लगाया है। इन अमेरिकी टैरिफों ने वैश्विक व्यापार साझेदारों के बीच वैकल्पिक साझेदारी ढूँढने की प्रेरणा दी, और यूरोपीय संघ के साथ यह FTA इसी रणनीति का परिणाम समझा जा रहा है।
प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को दोनों पक्षों के लिए “मदर ऑफ ऑल डील्स” (सबसे बड़ा व्यापार सौदा) बताया है, जिसका उद्देश्य व्यापार के अवसर बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलने की उम्मीद है क्योंकि कई उत्पादों पर शुल्क में कटौती से कीमतें कम हो सकती हैं।
इस व्यापक व्यापार समझौते को औपचारिक तौर पर लागू होने के लिए अब भारत की संसद, EU के सदस्य देशों और यूरोपीय संसद का अनुमोदन चाहिए, लेकिन इसके प्रभावी होने के बाद दोनों पक्षों के लिए यह कई दशकों में सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारी साबित होने की संभावना है।