नई दिल्ली-श्रीनगर : ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिकी-इजराइली हमलों में मौत के बाद भारत के कई राज्यों में विरोध की आग भड़क उठी है। रविवार और सोमवार को दिल्ली, कश्मीर, उत्तर प्रदेश और हैदराबाद सहित कई हिस्सों में हजारों लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। UttarWorld की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़ें देश के मौजूदा हालात:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारी विरोध प्रदर्शन देखा गया। 'ऑल इंडिया शिया काउंसिल' के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजराइल के झंडे जलाए। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने काले कपड़े पहन रखे थे और हाथों में खामेनेई की तस्वीरें लेकर "बदला" (Revenge) और "न्याय" की मांग की।
कश्मीर में 'शटडाउन' : श्रीनगर और कश्मीर घाटी के अन्य हिस्सों में स्थिति काफी तनावपूर्ण है। मुत्ताहिदा मजलिस-ए-उलेमा ने सोमवार को पूर्ण हड़ताल का आह्वान किया। धारा 144 और पाबंदियां प्रशासन ने एहतियातन कश्मीर में अगले दो दिनों (2 और 3 मार्च) के लिए सभी शिक्षण संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है। श्रीनगर मार्च ऐतिहासिक लाल चौक और संयुक्त राष्ट्र (UN) कार्यालय की ओर हजारों लोगों ने मार्च निकाला, जिसे रोकने के लिए सुरक्षाबलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
उत्तर प्रदेश: लखनऊ से अलीगढ़ तक प्रदर्शन शिया बाहुल्य इलाकों में शोक का माहौल है: लखनऊ ,में पुराने शहर के छोटा इमामबाड़ा से बड़ा इमामबाड़ा तक विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने इसे "कायराना हमला" करार दिया। अलीगढ़ (AMU) में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने कैंपस में मार्च निकाला और गायबौना नमाज़-ए-जनाज़ा (Funeral Prayer) अदा की। अमरोहा और मेरठ में यहाँ भी बाजारों को बंद रखकर शोक व्यक्त किया गया।
हैदराबाद के पुराने शहर में भी भारी भीड़ सड़कों पर उतरी। चारमीनार के आसपास के इलाकों में लोगों ने अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई को "आतंकवाद" बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की।
एक तरफ जहाँ देश में प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं भारत सरकार कूटनीतिक संतुलन बनाने में जुटी है: विदेश मंत्रालय (MEA) भारत ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में "गहरी चिंता" व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। सुरक्षा बैठक प्रधानमंत्री मोदी ने उच्च स्तरीय बैठक (CCS) कर खाड़ी देशों में मौजूद 1 करोड़ भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
भारत के लिए यह स्थिति बेहद नाजुक है। एक तरफ इजराइल हमारा रणनीतिक साझेदार है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ हमारे सांस्कृतिक और ऊर्जा संबंध (चाबहार पोर्ट) बहुत गहरे हैं। देश में हो रहे ये प्रदर्शन आने वाले समय में घरेलू राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं।