नई दिल्ली: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण संघर्ष अब भारत की अर्थव्यवस्था के लिए 'रेड अलर्ट' बन चुका है। ईरान और इजरायल के बीच युद्ध के 21 दिन पूरे होने के साथ ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह तनाव और खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।
कच्चे तेल में उबाल: होर्मुज जलडमरूमध्य और कुवैत की रिफाइनरी पर हुए हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। भारत अपनी जरूरत का करीब 85% तेल आयात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी भारत के व्यापार घाटे को कई अरब डॉलर बढ़ा देती है, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
क्या बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? तेल कंपनियों पर पड़ रहे बोझ को देखते हुए कयास लगाए जा रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 10 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, कतर से होने वाली गैस सप्लाई में रुकावट आने के कारण रसोई गैस (LPG) और सीएनजी (CNG) की कीमतों में भी भारी इजाफा होने की आशंका है।
भारत सरकार की रणनीति: भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। पेट्रोलियम मंत्रालय वैकल्पिक स्रोतों से तेल आयात करने और अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का उपयोग करने पर विचार कर रहा है। उत्तर वर्ल्ड (Uttar World) आपको बता दें कि इस महंगाई का असर ट्रांसपोर्टेशन और माल ढुलाई पर भी पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में फल, सब्जियां और अन्य जरूरी सामान भी महंगे हो सकते हैं।