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अमेरिका-ईरान युद्ध में बड़ा मोड़: ट्रंप ने की 'सीजफायर' की घोषणा, क्या झुक गया अमेरिका? जानें ईरान की 10 बड़ी शर्तें

By Uttar World Desk

08 अप्र, 2026 | 11:21 बजे
अमेरिका-ईरान युद्ध में बड़ा मोड़: ट्रंप ने की 'सीजफायर' की घोषणा, क्या झुक गया अमेरिका? जानें ईरान की 10 बड़ी शर्तें

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: पिछले 40 दिनों से मध्य पूर्व (Middle East) में चल रही भीषण जंग पर बुधवार को अचानक ब्रेक लग गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 14 दिनों के 'दोतरफा युद्धविराम' (Double-Sided Ceasefire) का ऐलान किया है। यह घोषणा उस समय हुई जब ट्रंप की खुद की दी हुई डेडलाइन खत्म होने में महज 2 घंटे बाकी थे। इससे पहले ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान नहीं झुका, तो उसके बुनियादी ढांचे और पूरी सभ्यता को तबाह कर दिया जाएगा।

पाकिस्तान और चीन की पर्दे के पीछे की भूमिका

इस बड़े युद्धविराम के पीछे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मध्यस्थता बताई जा रही है। ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि पाकिस्तान के नेतृत्व के अनुरोध पर उन्होंने हमले रोकने का फैसला किया है। वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स का दावा है कि चीन ने भी ईरान को इस समझौते के लिए राजी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शुक्रवार 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू होगी।

ईरान की 10 सूत्रीय मांगें: जिसने दुनिया को चौंकाया

ईरान ने इस युद्धविराम के बदले 10 ऐसी शर्तें रखी हैं, जिन्हें पहले अमेरिका सिरे से खारिज कर चुका था। लेकिन ट्रंप ने इन्हें 'काम के लायक' (Workable) बताया है। इन शर्तों में शामिल हैं:

  1. प्रतिबंधों की समाप्ति: अमेरिका को ईरान पर लगे सभी प्राथमिक और माध्यमिक आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाने होंगे।

  2. जब्त संपत्ति की वापसी: अमेरिका द्वारा रोकी गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति और फंड को तुरंत रिलीज करना होगा।

  3. हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण: रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण रहेगा और वहां से गुजरने वाले जहाजों को ईरान और ओमान को टोल देना होगा।

  4. सैनिकों की वापसी: मध्य पूर्व में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करना होगा।

  5. युद्ध का हर्जाना: ईरान में हुए नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका को पुनर्निर्माण लागत का भुगतान करना होगा।

  6. स्थाई शांति की गारंटी: क्षेत्र में स्थाई शांति और बाहरी दखलअंदाजी बंद करने का आश्वासन।

  7. परमाणु हथियार नहीं: बदले में ईरान ने प्रतिबद्धता जताई है कि वह परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा।

  8. क्षेत्रीय युद्ध का अंत: इराक, लेबनान और यमन में चल रहे संघर्षों को पूरी तरह से समाप्त करना।

  9. नेविगेशन सुरक्षा: हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षा देने का वादा।

  10. तत्काल युद्धविराम: इन शर्तों के मानने के तुरंत बाद सभी मोर्चों पर हमले बंद करना।

ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' और भारी नुकसान

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) शुरू किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑपरेशन के शुरुआती 100 घंटों में ही अमेरिका के लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 34,000 करोड़ रुपये) स्वाहा हो गए। हर दिन लगभग 891 मिलियन डॉलर का खर्च आ रहा था। माना जा रहा है कि इस भारी वित्तीय बोझ और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण ट्रंप को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा।

भारत के लिए बड़ी राहत: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आएगी गिरावट

इस युद्धविराम की खबर आते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 15% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के आसपास आ गया है।

  • सस्ता होगा तेल: भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% हिस्सा आयात करता है। तेल सस्ता होने से आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो सकते हैं।

  • शेयर बाजार में उछाल: खबर के बाद भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त तेजी देखी गई। रिलायंस और एचपीसीएल जैसे शेयरों में 9% तक की बढ़त रही।

  • सप्लाई चेन: हॉर्मुज का रास्ता खुलने से भारत की ऑटो इंडस्ट्री और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी, जो सप्लाई चेन बाधित होने से जूझ रहे थे।

इजराइल और लेबनान का रुख

हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हो गया है, लेकिन इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता केवल ईरान के साथ है। इजराइल लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने ऑपरेशन जारी रखेगा। इससे साफ है कि अभी भी मध्य पूर्व में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ट्रंप का अमेरिका में विरोध

युद्धविराम के बावजूद ट्रंप को अपने ही देश में आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। लगभग 70 डेमोक्रेटिक सांसदों ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ट्रंप ने पहले ईरान को मिटाने की धमकी दी और अब उसकी शर्तों को मानकर अमेरिका की छवि कमजोर की है।

निष्कर्ष: यह 14 दिनों का युद्धविराम दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण है। अगर इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत सफल रहती है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलेगी। उत्तर प्रदेश और भारत के आम नागरिक के लिए यह खबर महंगाई कम होने की उम्मीद लेकर आई है।

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