पश्चिम बंगाल में 8 जनवरी 2026 को राजनीतिक परामर्श संस्था I-PAC (Indian Political Action Committee) के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) पार्टी ने इसे राजनीतिक लक्ष्यीकरण करार देते हुए प्रतिक्रिया तेज कर दी है।
छापेमारी के एक दिन बाद ममता और उनके सहयोगियों ने I-PAC के स्टाफ के लिए ‘सीक्रेट गाइडलाइंस’ लागू करने का निर्णय लिया। दैनिक भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक यह नया निर्देश I-PAC कर्मचारियों को अनौपचारिक रणनीति, संचार और कार्रवाई के दौरान सुरक्षा और सावधानियों का पालन करने के लिए जारी किया गया था। छापेमारी और उसके तत्काल बाद हुई आपातकालीन बैठक में ये गाइडलाइंस तैयार की गईं, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी और परामर्श संगठन कार्य में सतर्कता रखेंगे।
ममता बनर्जी ने ED के इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि यह छापेमारी राजनीतिक रूप से लक्षित है और आगामी विधानसभा चुनाव-2026 में TMC की रणनीति को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि ED द्वारा दस्तावेज़ों और उपकरणों को जब्त करना चुनावी रणनीति समेत पार्टी की आंतरिक जानकारी को प्रभावित कर सकता है।
ED का कहना है कि यह कार्रवाई कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में सबूत जुटाने के लिए की गई थी, न कि किसी पार्टी के खिलाफ प्रत्यक्ष सत्ता संघर्ष के लिए। लेकिन ममता समेत TMC के नेताओं ने इसे केंद्र सरकार का दुरुपयोग कर चुनावी दबाव बनाने वाला कदम बताया है और उन्होंने उच्च न्यायालय में भी पदाधिकारी कार्रवाई की याचिका दायर की है।
इस पूरे विवाद ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को और गरमाया हुआ बना दिया है, खासकर 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले, जहां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच मुकाबला और तीव्र हुआ है।