नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच भारत में गहराते ऊर्जा संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल लिया है। मंगलवार को हुई हाई-लेवल केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पीएम मोदी ने स्पष्ट संदेश दिया कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि युद्ध की विभीषिका के बावजूद भारत के आम नागरिकों की रसोई और अर्थव्यवस्था पर इसका आंच नहीं आना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में देशवासियों को भरोसा दिलाया कि भारत के पास एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा, "पैनिक होने की जरूरत नहीं है, सप्लाई चैन को सुरक्षित रखने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है।" पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी पुष्टि की कि भारत के पास लगभग 8 हफ्तों का तेल भंडार सुरक्षित है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए काफी है।
जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने Essential Commodities Act 1955 को सक्रिय कर दिया है। इसके तहत 'नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर 2026' नोटिफाई किया गया है। अब पहली प्राथमिकता घरेलू रसोई गैस (Domestic LPG) को दी जाएगी। उसके बाद ही कमर्शियल और अन्य उद्योगों को सप्लाई मिलेगी। इस आदेश के बाद होटलों और रेस्टोरेंट्स में पैनिक जैसी स्थिति बन गई है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे जरूरी क्षेत्रों को सप्लाई निर्बाध मिलती रहेगी।
भारत अपनी जरूरत का करीब 85-90% तेल विदेशों से मंगाता है, जिसका बड़ा हिस्सा 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से होकर आता है। युद्ध के कारण यह रास्ता असुरक्षित हो गया है। इसे देखते हुए कैबिनेट ने 40 से ज्यादा देशों से तेल और गैस आयात करने की वैकल्पिक रणनीति तैयार की है। भारत अब खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल की खरीद में भारी इजाफा करने जा रहा है।
सरकार ने तेल कंपनियों को घरेलू एलपीजी का उत्पादन तत्काल प्रभाव से बढ़ाने का आदेश दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस निर्देश के बाद उत्पादन में 10 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। इसके अलावा, सरकार ने एक विशेष समिति का गठन किया है जो सप्लाई और वितरण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगी ताकि बिचौलिए इसका फायदा न उठा सकें।
आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने बुकिंग नियमों को भी सख्त कर दिया है। अब एक सिलेंडर मिलने के बाद अगले 25 दिनों तक नई रिफिल बुक नहीं की जा सकेगी। यह कदम उन लोगों के लिए उठाया गया है जो डर की वजह से जरूरत से ज्यादा सिलेंडर घर में जमा कर रहे थे। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वे रेस्टोरेंट और होटल मालिकों के साथ बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालें, लेकिन घरेलू उपभोक्ताओं के हितों से कोई समझौता न करें।
एक तरफ जहां युद्ध का तनाव है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक बाजार से भारत के लिए राहत भरी खबर भी है। कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई हैं। कीमतों में यह गिरावट भारत के आयात बिल (Import Bill) के दबाव को कम करने में मदद करेगी।