नई दिल्ली। केंद्र सरकार के रेलवे मंत्रालय ने देशभर में रेल संचालन को तेज, सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण रेल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं का मुख्य लक्ष्य रेल मार्गों पर बढ़ती भीड़ को कम करना, रूट क्षमता बढ़ाना और यात्री तथा माल ढुलाई की सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार मंजूर की गई परियोजनाओं में मुख्य रूप से लाइन डबलिंग, तीसरी और चौथी लाइनें, बाईपास कॉरिडोर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलिंग सिस्टम शामिल हैं। ये कदम रेल नेटवर्क के परिचालन क्षमता को बढ़ाने और देरी को कम करने में मदद करेंगे।
झारखंड में प्रमुख विस्तार
‘बारबेंदा–दमरुघुटु’ लाइन का डबलिंग और ‘दमरुघुटु–बोकारो स्टील सिटी’ के बीच तीसरी व चौथी लाइनों का निर्माण किया जाएगा। इस रूट पर वर्तमान में ट्रेनों का दबाव 108% है, जिससे दैनिक सेवा प्रभावित होती है। इन लाइनों के बनने से क्षमता बढ़ेगी और माल व यात्री सेवाओं में तेजी आएगी।
उत्तर रेलवे में सुरक्षा उन्नयन
उत्तर रेलवे के तहत इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम (EI) 34 स्टेशनों पर लगाया जाएगा, जिसमें दिल्ली और अंबाला डिवीज़न के स्टेशन शामिल हैं। यह आधुनिक सिस्टम ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित और कुशल बनाएगा।
विशाल रूट सुधार परियोजनाएँ
पंजाब में राजपुरा बाईपास लाइन को मंजूरी दी गई है, जो भीड़ घटाने और संचालन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अलावा, केरल के ‘अलप्पुझा–अम्बलापुझा’ और तमिलनाडु के ‘इरुगुर–पोडानूर’ डबलिंग प्रोजेक्ट से यात्रियों और माल ट्रेनों का संचालन और तेज़ होगा।
खास बात यह है कि इन परियोजनाओं से ट्रेन के रुकने का समय (डिटेंशन) कम होगा, जिससे ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार आएगा और रेलमार्गों पर यात्री व माल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की क्षमता भी सामने आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल भारतीय रेलवे के परिचालन और सुरक्षा मानकों को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।
रेल मंत्रालय का कहना है कि ये कदम रेल नेटवर्क के जटिल परिचालन को सरल, तेज और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन साबित होंगे, जिससे यात्रियों और व्यापार दोनों को लाभ मिलेगा।