मंगलवार, 17 मार्च 2026
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सुप्रीम कोर्ट की हाई कोर्ट को फटकार: 'ब्लेम गेम' बंद करें, अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में लाएं तेजी

By Uttar World Desk

20 फ़र, 2026 | 11:40 बजे
सुप्रीम कोर्ट की हाई कोर्ट को फटकार: 'ब्लेम गेम' बंद करें, अदालतों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में लाएं तेजी

नई दिल्ली। देश की अदालतों में लंबित पड़े लाखों मुकदमों और जजों की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न हाई कोर्ट्स (High Courts) द्वारा नियुक्तियों में हो रही देरी और इसके लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण करने की प्रक्रिया को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्याय वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) की नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी तरह का 'ब्लेम गेम' (Arop-Pratyarop) स्वीकार्य नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें देश भर की निचली अदालतों में न्यायिक अधिकारियों के रिक्त पदों को भरने की मांग की गई है। कोर्ट ने पाया कि कई राज्यों में चयन प्रक्रिया (Selection Process) और नियुक्तियों को लेकर हाई कोर्ट और राज्य सरकारों के बीच तालमेल की कमी है। इसी पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि न्यायिक नियुक्तियों में देरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है, जिन्हें न्याय के लिए सालों इंतजार करना पड़ता है।

जस्टिस की बेंच ने हाई कोर्ट्स को निर्देश दिया है कि वे अपनी चयन समितियों (Selection Committees) को सक्रिय करें और समयबद्ध तरीके से नियुक्तियों को पूरा करें। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक बुनियादी ढांचे और अधिकारियों की कमी को दूर करना केवल संवैधानिक अनिवार्यता नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को भी निर्देश दिया कि वे इस प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर पेश करें।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की निचली अदालतों में जजों की भारी कमी है, जिसके कारण करोड़ों केस लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप इस संकट को हल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हाई कोर्ट और राज्य सरकारें मिलकर काम करें, तो रिक्त पदों को 6 महीने के भीतर भरा जा सकता है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि नियुक्तियों में जानबूझकर देरी की गई, तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा।

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