चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी तापमान अपने चरम पर है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में निर्वाचन आयोग की टीम ने चेन्नई का दौरा किया और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों से मिले संकेतों के आधार पर चुनाव की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यह है कि क्या तमिलनाडु में इस बार सभी 234 सीटों पर मतदान एक ही चरण (Single Phase) में होगा?
CEC का रुख: बैठक के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य "निष्पक्ष और सुलभ चुनाव" कराना है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राज्य की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एक-चरणीय चुनाव की संभावना सबसे ज्यादा है।
तर्क: राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पिछली चुनावी कार्यप्रणाली को देखते हुए, चुनाव आयोग इस बार भी कम समय में चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के पक्ष में दिख रहा है।
ECI की टीम ने राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों (DMK, AIADMK, BJP, और अन्य) के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। कई दलों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत की है। आयोग ने भरोसा दिलाया है कि मतदान से पहले सूची का 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) पूरा किया जाएगा। चुनाव के दौरान पैसे और उपहार बांटने की घटनाओं को रोकने के लिए आयोग ने सख्त निगरानी और 'फ्लाइंग स्क्वायड' को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। फेक न्यूज और भड़काऊ बयानों को रोकने के लिए ECI ने सोशल मीडिया सेल को अलर्ट मोड पर रहने को कहा है।
सत्तारूढ़ DMK दल ने समय पर चुनाव और निष्पक्ष प्रशासनिक व्यवस्था की मांग की है। विपक्ष AIADMK मुख्य विपक्षी दल ने विशेष रूप से 'बूथ कैप्चरिंग' के प्रति सतर्क रहने और पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने तमिलनाडु में चुनावी भ्रष्टाचार और मनी पावर के इस्तेमाल को रोकने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।
चुनाव आयोग के इस दौरे के बाद, अब आयोग दिल्ली में समीक्षा बैठक करेगा और उसके बाद चुनाव की तारीखों का ऐलान (Schedule Announcement) किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में चुनाव आचार संहिता लग सकती है।