पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों विकास और मुद्दों से ज्यादा 'निजी हमलों' का बोलबाला दिख रहा है। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव के बीच शुरू हुई जुबानी जंग अब 'हाथी और बंदर' जैसे शब्दों तक पहुँच गई है। नवभारत लाइव की रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ यह विवाद अब सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए मर्यादा की सीमाओं को लांघता नजर आ रहा है।
सम्राट चौधरी का 'हाथी' वाला तंज विवाद की शुरुआत तब हुई जब डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सदन में बिहार की कानून-व्यवस्था का बचाव करते हुए पप्पू यादव पर निशाना साधा। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि, "आज बिहार पुलिस का इकबाल इतना बुलंद है कि 'हाथी' (पप्पू यादव) भी डर के मारे बीमार होकर अस्पताल में छिपना चाहता है।" सम्राट चौधरी का इशारा हाल ही में पप्पू यादव के अस्पताल में भर्ती होने और पुलिसिया कार्रवाई के डर की ओर था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग एयरपोर्ट पर कहते हैं कि बिहार पुलिस चींटी भी नहीं मार पाती, वे आज खुद डरे हुए हैं।
पप्पू यादव का 'बंदर' वाला पलटवार सम्राट चौधरी के इस बयान पर पप्पू यादव ने बेहद तीखा और विवादित पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर सम्राट चौधरी को 'बंदर' करार दिया। पप्पू यादव ने लिखा, "जो कभी नाबालिग था, वह अब बंदर बन गया है और इस बंदर के हाथ में बिहार है।" उन्होंने सम्राट चौधरी की पगड़ी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि स्वाभिमान की पगड़ी को कमीशन बटोरने के लिए अब 'गमछा' बना लिया गया है। पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सरकार अपराधियों को पकड़ने के बजाय विपक्ष को डराने में जुटी है।
सियासी गलियारों में चर्चा इस 'हाथी बनाम बंदर' वाली बयानबाजी ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। बीजेपी समर्थकों का कहना है कि सम्राट चौधरी ने अपराधी मानसिकता वाले लोगों को आईना दिखाया है, जबकि आरजेडी और पप्पू यादव के समर्थकों का मानना है कि डिप्टी सीएम जैसे गरिमामय पद पर बैठकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना शोभा नहीं देता। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025-26 के चुनावी मोड में आने से पहले बिहार की राजनीति और भी ज्यादा व्यक्तिगत और आक्रामक होने वाली है।