मंगलवार, 24 मार्च 2026
अन्य राज्य

गुजरात विधानसभा में पेश हुआ समान नागरिक संहिता (UCC) बिल: सीएम भूपेंद्र पटेल ने पेश किया ऐतिहासिक प्रस्ताव

By Uttar World Desk

24 मा, 2026 | 06:16 बजे
गुजरात विधानसभा में पेश हुआ समान नागरिक संहिता (UCC) बिल: सीएम भूपेंद्र पटेल ने पेश किया ऐतिहासिक प्रस्ताव

गाँधीनगर |  गुजरात की राजनीति और कानूनी ढांचे के लिए आज का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आज, 24 मार्च 2026 को गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) बिल पेश कर दिया है। उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बनने की राह पर है, जो अपने नागरिकों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून (Personal Laws) लागू करेगा।

क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?

समान नागरिक संहिता का अर्थ है कि देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून होगा, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का हो। वर्तमान में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामले अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ के आधार पर चलते हैं। लेकिन UCC लागू होने के बाद, गुजरात के सभी निवासियों पर ये कानून समान रूप से लागू होंगे।

गुजरात UCC बिल की मुख्य बातें:

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा पेश किए गए इस बिल में लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय पर विशेष जोर दिया गया है। इसके कुछ प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • विरासत में समान अधिकार: बिल के अनुसार, बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार मिलेगा, जो आधुनिक संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है।

  • शादी की न्यूनतम उम्र: सभी समुदायों के लिए शादी की एक न्यूनतम उम्र तय की गई है, ताकि बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोका जा सके।

  • अनिवार्य पंजीकरण (Compulsory Registration): शादियों और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अब अनिवार्य होगा, जिससे सभी पक्षों को कानूनी सुरक्षा मिल सके।

  • बहुविवाह पर रोक: UCC के मूल सिद्धांत के तहत, इस बिल में बहुविवाह (Polygamy) पर पूरी तरह से रोक लगाने का प्रस्ताव है।

कार्यान्वयन की प्रक्रिया (Path to Implementation)

गुजरात सरकार ने पहले ही इस कानून के मसौदे (Draft) को तैयार करने के लिए एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया था। विधानसभा में बिल पेश करते हुए सीएम ने कहा कि यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (Article 44) के तहत राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

जहां सत्ताधारी दल इसे "समानता की ओर एक प्रगतिशील कदम" बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों और कुछ सामुदायिक नेताओं ने सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण को लेकर चिंता जताई है। आने वाले दिनों में विधानसभा में इस बिल के विभिन्न प्रावधानों पर तीखी बहस होने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा जाएगा।

निष्कर्ष

गुजरात में UCC बिल का पेश होना एक मील का पत्थर है, जो निश्चित रूप से भारत में कानूनी एकरूपता पर राष्ट्रीय बहस को प्रभावित करेगा। यदि यह पारित हो जाता है, तो यह राज्य में पारिवारिक और व्यक्तिगत विवादों के निपटारे के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा।

Uttar World News on Facebook

खबरों की पल-पल की अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को अभी लाइक करें।

अभी Like करें