प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एसिड अटैक (तेजाब हमले) के एक मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एफआईआर (FIR) रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में साफ कहा कि एसिड अटैक जैसा जघन्य अपराध केवल किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरे समाज के खिलाफ अपराध है। ऐसे मामलों में केवल आपसी समझौते के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
यह मामला उत्तर प्रदेश के एक जिले का है, जहाँ आरोपी के खिलाफ एसिड अटैक की धाराओं में मुकदमा दर्ज था। आरोपी पक्ष ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर गुहार लगाई थी कि उसका पीड़िता के साथ समझौता हो गया है, इसलिए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया जाए। आरोपी का तर्क था कि चूंकि दोनों पक्ष अब विवाद खत्म करना चाहते हैं, इसलिए कानूनी कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
जस्टिस की बेंच ने इस दलील को सिरे से नकार दिया। कोर्ट ने कहा कि कुछ अपराध ऐसे होते हैं जो समाज की अंतरात्मा को झकझोर देते हैं। एसिड अटैक उनमें से एक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही पीड़िता और आरोपी के बीच कोई समझौता हो गया हो, लेकिन कानून ऐसे गंभीर अपराधों में आंखें मूंदकर एफआईआर रद्द नहीं कर सकता। कोर्ट ने माना कि ऐसे अपराधियों को छोड़ना समाज में गलत संदेश भेजेगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर चिंता जाहिर की। कोर्ट ने कहा कि एसिड अटैक पीड़िता न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी जीवनभर का दंश झेलती है। ऐसे मामलों में कठोर कानूनी प्रक्रिया का पालन होना अनिवार्य है ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके।