प्रयागराज के फाफामऊ इलाके से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को पैसे और मोबाइल फोन का लालच देकर डोनर बनने के लिए बहला-फुसलाया गया और उसकी पहचान बदलकर फर्जी दस्तावेजों में “बालिग और शादीशुदा” दर्शाया गया।
मांगलिक काम दिलाने का झांसा देकर लड़की को पलक नाम की महिला और उसकी मां रिंकी ने अपने साथ लिया, जहाँ से उसके व्यवहार में बदलाव दिखने लगे। बाद में वह IVF सेंटर तक पहुंची, जहाँ फर्जी आधार कार्ड और कंसेंट एफिडेविट के आधार पर उसके अंडाणु (ओवा) निकाल लिए गए।
लड़की की माँ ने जैसे ही शक कर फाफामऊ थाने में शिकायत दर्ज कराई, पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखकर जांच तेज कर दी। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने बयान दर्ज होने के बाद पता चला कि नाबालिग को यह पूरी प्रक्रिया समझाए बिना ही बहला-फुसलाकर ले जाया गया था और संभावित रूप से उसकी सहमति भी ग़लत तरी़के से ली गई थी।
पुलिस ने अब तक पलक, रिंकी, सीमा, हिमांशु और कल्पना नाम के आरोपियों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह भी तलाश रही हैं कि कहीं इसी तरह के अन्य युवतियों के साथ भी ऐसा कोई नेटवर्क सक्रिय तो नहीं था।
यह मामला IVF प्रक्रिया के दुरुपयोग, नाबालिगों के शोषण और फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने जैसी गंभीर कानूनी और सामाजिक चिंताओं को उजागर करता है, और इस पर पुलिस एवं अधिकारियों की जांच जारी है।