सिद्धार्थनगर। जिले में एक प्राथमिक शिक्षक उस वक्त सन्न रह गया, जब आयकर विभाग ने उसे ₹2 करोड़ का टैक्स जमा करने का नोटिस थमा दिया। पीड़ित शिक्षक, जो एक सामान्य वेतन पर अपना परिवार चलाता है, अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है। जांच में पता चला है कि यह मामला एक बड़े पैन कार्ड फ्रॉड और जीएसटी स्कैम से जुड़ा है, जहाँ शिक्षक के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर करोड़ों का टर्नओवर दिखाया गया।
सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज क्षेत्र के रहने वाले शिक्षक के पास आयकर विभाग और जीएसटी इंटेलिजेंस का नोटिस पहुँचा। नोटिस के अनुसार, उनके नाम पर कई फर्जी फर्में (कंपनियां) रजिस्टर्ड हैं, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का व्यावसायिक लेनदेन किया गया है। शिक्षक का कहना है कि उन्होंने कभी कोई बिजनेस नहीं किया और न ही कोई कंपनी खोली। उन्हें अंदेशा है कि किसी अज्ञात गिरोह ने उनके पैन कार्ड और आधार कार्ड का डेटा चुराकर यह फर्जीवाड़ा किया है।

साइबर ठग आजकल सीधे लोगों के बैंक खाते खाली करने के बजाय उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल कर शेल कंपनियां (फर्जी कंपनियां) बना रहे हैं। इन कंपनियों के जरिए जीएसटी चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला जाता है। जब टैक्स चोरी पकड़ी जाती है, तो विभाग उस व्यक्ति को नोटिस भेजता है जिसके नाम पर पैन कार्ड होता है, जबकि असली अपराधी गायब हो जाते हैं।
पीड़ित शिक्षक ने जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) और आयकर विभाग के अधिकारियों से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस ने मामला साइबर सेल को सौंप दिया है। जांच अधिकारी अब उन बैंक खातों और फर्मों के रिकॉर्ड खंगाल रहे हैं जो शिक्षक के पैन कार्ड पर चल रहे थे।