मंगलवार, 17 मार्च 2026
सीतापुर

सीतापुर: डीएम डॉ. राजागणपति आर. का 'रुद्र' रूप, महोली में भ्रष्टाचार की ईंट-ईंट उखाड़ी; लापरवाह अफसरों में हड़कंप

By Uttar World Desk

27 जन, 2026 | 06:36 बजे
सीतापुर: डीएम डॉ. राजागणपति आर. का 'रुद्र' रूप, महोली में भ्रष्टाचार की ईंट-ईंट उखाड़ी; लापरवाह अफसरों में हड़कंप

सीतापुर : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का असर अब धरातल पर कड़ाई से दिखने लगा है। इसी क्रम में मंगलवार को सीतापुर के जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने महोली तहसील क्षेत्र के अंतर्गत जिला पंचायत द्वारा संचालित विभिन्न विकास कार्यों का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का एक सख्त और अनुशासित स्वरूप देखने को मिला, जिससे न केवल मौके पर मौजूद अधिकारी सहम गए, बल्कि निर्माण कार्यों में लगी एजेंसियों की पोल भी खुल गई।

जिलाधिकारी के निरीक्षण का पहला पड़ाव महोली तहसील का कुंवरपुर गद्दी विद्यालय से बारिया गांव तक बनाया गया खड़ंजा मार्ग था। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों और कार्यों की समीक्षा के उद्देश्य से जब डीएम वहां पहुंचे, तो प्रथम दृष्टया ही खड़ंजे की बिछावट मानकविहीन नजर आई।

जिलाधिकारी ने किसी रिपोर्ट का इंतजार करने के बजाय स्वयं कमान संभाली। उन्होंने मौके पर मजदूरों से खड़ंजे की ईंटें उखड़वाकर नीचे की जमीन और सामग्री की जांच की। जांच में पाया गया कि ईंटों के नीचे जो आधार (Base) होना चाहिए था, वह मानकों के अनुरूप नहीं था। बिछाव में तकनीकी खामियां साफ नजर आ रही थीं। जिलाधिकारी ने इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जनता के पैसे का इस तरह दुरुपयोग अक्षम्य है।

JE पर गिरी गाज: निर्माण कार्य की देखरेख करने वाले जूनियर इंजीनियर (JE) संदीप सिंह की लापरवाही पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मौके पर मौजूद उच्चाधिकारियों को निर्देश दिए कि जेई संदीप सिंह से तत्काल स्पष्टीकरण प्राप्त किया जाए और यदि संतोषजनक जवाब न मिले तो दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

खड़ंजे की जांच के बाद डीएम का काफिला महोली के बड़ा गांव पहुंचा। यहाँ मितौली तिराहे से मंदिर के सामने स्थित तालाब तक नाले का निर्माण कार्य चल रहा था। नाला निर्माण किसी भी गांव की जल निकासी व्यवस्था की रीढ़ होता है, लेकिन यहाँ भी लापरवाही की बू आ रही थी।

 

डीएम डॉ. राजागणपति ने निर्माणाधीन नाले में प्रयुक्त हो रहे आरसीसी (RCC) मसाले का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि सीमेंट, मौरंग और गिट्टी का अनुपात तकनीकी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा था। मसाला हाथ से छूने पर ही भरभरा कर गिर रहा था। जिलाधिकारी ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल काम रुकवाया और निर्देश दिए कि मसाले के सैंपल (नमूने) सील कर सरकारी प्रयोगशाला (लैब) भेजे जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि लैब रिपोर्ट में गुणवत्ता खराब पाई गई, तो संबंधित ठेकेदार और निगरानी अधिकारी के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज कराने से भी गुरेज नहीं किया जाएगा।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अपर मुख्य अधिकारी अभिषेक सिंह को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि कार्यालयों में बैठकर फाइलों को पास करने का दौर खत्म हो चुका है। डीएम ने आदेश दिया कि जब तक किसी भी विकास कार्य की मौके पर जाकर गुणवत्ता की समुचित जांच न कर ली जाए, तब तक उसकी पेमेंट या अगली फाइल आगे न बढ़ाई जाए।

उन्होंने कहा, "विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता मेरी प्राथमिकता है। यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।"

जिलाधिकारी के इस औचक निरीक्षण की खबर जैसे ही पूरे जनपद में फैली, अन्य निर्माण परियोजनाओं से जुड़ी एजेंसियों और विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अक्सर यह देखा जाता है कि अधिकारी केवल कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करते हैं, लेकिन डॉ. राजागणपति आर. द्वारा स्वयं फावड़ा उठवाकर या ईंटें उखड़वाकर जांच करने के तरीके ने लापरवाह लोगों की नींद उड़ा दी है।

निष्कर्ष: सीतापुर डीएम का यह कदम जनपद में सुशासन और जवाबदेही तय करने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में अक्सर खड़ंजा और नाला निर्माण जैसे कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायतें आती हैं, लेकिन इस तरह की प्रशासनिक सख्ती से भविष्य में ठेकेदार और अधिकारी मानकों के साथ समझौता करने से पहले सौ बार सोचेंगे।

निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत के अन्य तकनीकी विशेषज्ञ और क्षेत्रीय राजस्व अधिकारी भी मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने अंत में ग्रामीणों से भी बातचीत की और उन्हें आश्वस्त किया कि उनके गांव में होने वाला हर काम उच्च गुणवत्ता का होगा।

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