नई दिल्ली (Uttar World News Desk): भारतीय बैडमिंटन के इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 1965 एक ऐसी चमक बिखेरता है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इंडियन एक्सप्रेस (Indian Express) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, दिग्गज खिलाड़ी दिनेश खन्ना ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप में पुरुष एकल (Men's Singles) का खिताब जीतकर भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल हासिल किया था। यह ऐतिहासिक उपलब्धि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कोर्ट पर दर्ज की गई थी, जिसने भारतीय बैडमिंटन को वैश्विक पहचान दिलाने की नींव रखी। दिनेश खन्ना एशिया के उस दौर के सबसे कठिन प्रतिद्वंदियों को मात देकर चैंपियन बने थे, जो आज भी भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि 1960 के दशक में जब संसाधनों की कमी थी, तब दिनेश खन्ना की इस जीत ने भारत में बैडमिंटन के प्रति एक नई लहर पैदा की थी। लखनऊ में खेले गए उस फाइनल मुकाबले की यादें आज भी उन खेल प्रेमियों के जेहन में ताजा हैं जिन्होंने भारतीय बैडमिंटन को शिखर पर पहुंचते देखा था। आज जब पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन जैसे खिलाड़ी दुनिया भर में तिरंगा फहरा रहे हैं, तो 1965 की वह जीत हमें याद दिलाती है कि भारतीय बैडमिंटन की असली रफ़्तार लखनऊ की उसी माटी से शुरू हुई थी। दिनेश खन्ना की यह विरासत आज के युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है।