खेल डेस्क : मध्य-पूर्व में जारी भीषण गोलाबारी और तनाव के बीच खेल के मैदान से एक हैरान करने वाली खबर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फीफा (FIFA) अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से मुलाकात के दौरान कहा है कि उन्हें फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ईरानी फुटबॉल टीम की भागीदारी से कोई परहेज नहीं है। UttarWorld News की रिपोर्ट में जानिए क्या है इस "स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी" के पीछे की पूरी कहानी।
1. ट्रंप का बयान: "ईरान का स्वागत है"
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इंस्टाग्राम पर जानकारी दी कि वाशिंगटन में हुई एक बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने दोहराया है कि ईरानी टीम टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए अमेरिका आने के लिए स्वतंत्र है। इन्फेंटिनो के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि "ईरानी टीम का टूर्नामेंट में खेलने के लिए स्वागत है।" हालांकि, एक इंटरव्यू में ट्रंप ने यह भी तंज कसा कि वह ईरान की भागीदारी को लेकर चिंतित नहीं हैं क्योंकि वह एक "बुरी तरह से हारा हुआ देश" है।
2. क्या है फीफा का डर?
फीफा को डर था कि अगर अमेरिका ने ईरान की टीम को वीज़ा देने या खेलने से मना किया, तो अमेरिका से वर्ल्ड कप की मेजबानी छीनी जा सकती है। ऐसा ही कुछ तीन साल पहले इंडोनेशिया के साथ हुआ था, जब उन्होंने इजरायली टीम का स्वागत करने से मना कर दिया था और फीफा ने उनसे अंडर-20 वर्ल्ड कप की मेजबानी छीन ली थी।
3. ईरान की भागीदारी पर संशय बरकरार
भले ही अमेरिका ने "स्वागत" की बात कही हो, लेकिन ईरान के फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज ने टीम भेजने पर संदेह जताया है। उन्होंने ईरानी सरकारी टीवी पर सवाल उठाया, "अगर वर्ल्ड कप का माहौल ऐसा (युद्ध जैसा) है, तो कौन अपनी राष्ट्रीय टीम को ऐसी जगह भेजेगा?" इसके अलावा, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में एशियाई कप के दौरान कई ईरानी महिला फुटबॉलरों के शरण मांगने की घटना ने भी ईरान सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
4. लॉस एंजिल्स और सिएटल में होने हैं ईरान के मैच
शेड्यूल के मुताबिक, ईरान के दो मैच लॉस एंजिल्स में और एक मैच सिएटल में होना है। दिलचस्प बात यह है कि अगर अमेरिका और ईरान दोनों अपने ग्रुप में दूसरे स्थान पर रहते हैं, तो 3 जुलाई को डलास में इन दोनों देशों के बीच नॉकआउट मुकाबला (Elimination Match) भी हो सकता है।
5. "फुटबॉल दुनिया को जोड़ता है"
फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो ने ट्रंप को इस समर्थन के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि आज के दौर में वर्ल्ड कप जैसे आयोजनों की सबसे ज्यादा जरूरत है ताकि लोगों को करीब लाया जा सके। उन्होंने इसे "Football Unites the World" (फुटबॉल दुनिया को जोड़ता है) के संदेश की जीत बताया।