दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स और क्लाउड कंपनियों में शामिल Amazon एक बार फिर बड़े स्तर पर छंटनी की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आज 27 जनवरी से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया में करीब 16,000 कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती हैं। खास बात यह है कि इस बार भारत में काम कर रही टीमों पर असर सबसे ज़्यादा पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहली नजर में यह फैसला लागत कम करने जैसा लग सकता है, लेकिन अंदरूनी रिपोर्ट्स कुछ और कहानी बता रही हैं। Amazon अब अपने संगठन को “कम मैनेजमेंट लेयर, ज्यादा ऑटोमेशन और तेज फैसले” वाले मॉडल में बदलना चाहता है। मतलब बीच के मैनेजर कम, AI और ऑटोमेटेड सिस्टम ज्यादा, छोटे लेकिन ज्यादा जिम्मेदारी वाले टीम स्ट्रक्चर। इसी बदलाव की कीमत अब कर्मचारियों को चुकानी पड़ रही है।
भारत की टीम क्यों सबसे ज्यादा प्रभावित? भारत में Amazon की बड़ी टीमें: AWS (Cloud Services), Prime Video & Content Operations, Customer Support & HR Tech (PXT). पिछले कुछ सालों में Amazon ने भारत को low-cost global operations hub बनाया था। अब कंपनी मान रही है कि कुछ टीमें जरूरत से ज्यादा बड़ी हो गई हैं। इसी वजह से Bengaluru, Hyderabad और Chennai जैसे टेक हब्स में काम करने वाले कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है।
पहले भी हो चुकी है छंटनी, फिर क्यों? यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। 2025 के अंत में ~14,000 नौकरियां पहले ही जा चुकी हैं, 2026 के मध्य तक 30,000 से ज्यादा पद खत्म होने का अनुमान.... इसका सीधा मतलब है कि Amazon अब तेजी से बढ़ने (growth-first) से हटकर profit + efficiency-first मॉडल पर जा रहा है और इसमें मानव संसाधन सबसे आसान कटौती बनता दिख रहा है।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कुछ कर्मचारियों को WARN नोटिस भेजे जा चुके हैं, परफॉर्मेंस रिव्यू अचानक सख्त हुए हैं, कई टीमों में नए प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं, यानी छंटनी सिर्फ नंबर की नहीं, बल्कि पूरा वर्क कल्चर बदलने की शुरुआत है। जिससे कर्मचारियों पर खतरे की घंटी लटक रही है। Amazon का यह कदम बाकी टेक कंपनियों के लिए भी संकेत (signal) माना जा रहा है... AI के बाद मिड-लेवल टेक जॉब्स सबसे ज्यादा असुरक्षित केवल कोडिंग नहीं, decision-making + domain skills जरूरी Remote और contract-based roles बढ़ सकते हैं
निष्कर्ष : Amazon की छंटनी सिर्फ कंपनी का फैसला नहीं, पूरी ग्लोबल टेक इंडस्ट्री की दिशा दिखा रही है। भारत की टेक टीम अब सिर्फ “सस्ता ऑप्शन” नहीं, बल्कि री-स्ट्रक्चरिंग का पहला शिकार बन रही है। आने वाले समय में स्थायी नौकरी से ज्यादा स्किल-ड्रिवन काम अहम होगा।