श्रावस्ती : जिले से एक बेहद दर्दनाक और रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है। जिले के सोनवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नारायणपुर गांव में मंगलवार की दोपहर उस समय चीख-पुकार मच गई, जब राप्ती नदी में नहाने गईं दो मासूम बच्चियों की गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। इस हृदय विदारक घटना ने न केवल पीड़ित परिवारों को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि पूरे इलाके में मातम का सन्नाटा पसरा हुआ है। मृत बच्चियों की पहचान 11 वर्षीय अंशिका पुत्री स्वर्गीय धर्मराज और 13 वर्षीय गुलशन पुत्री छोटकउ के रूप में हुई है। दोनों आपस में गहरी सहेलियां थीं और अक्सर साथ ही खेला करती थीं, लेकिन किसे पता था कि मौत भी उन्हें एक साथ ही आएगी।
मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार दोपहर को अंशिका और गुलशन घर के पास टहलते हुए गांव से महज 500 मीटर की दूरी पर बह रही राप्ती नदी के तट पर पहुंच गई थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गर्मी से राहत पाने के लिए दोनों सहेलियां नदी के पानी में नहाने के लिए उतरी थीं। इसी दौरान नदी के तल में अचानक पैर फिसल जाने के कारण वे गहरे पानी वाले हिस्से में चली गईं। बच्चियों को डूबता देख किनारे पर मौजूद अन्य छोटे बच्चों ने शोर मचाना शुरू किया। बच्चों की आवाज सुनकर जब तक ग्रामीण और परिजन दौड़कर मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला, तब तक काफी देर हो चुकी थी। बाहर निकाले जाने पर दोनों बच्चियां बेसुध थीं और कुछ ही देर में उनकी मृत्यु की पुष्टि हो गई।
ग्रामीणों ने बताया कि राप्ती नदी के भयंकर कटान के कारण इन बच्चियों के परिवार का जीवन पहले ही संघर्षपूर्ण रहा है। नदी की वजह से बेघर हुए ये परिवार पिछले कई सालों से नदी के दूसरी तरफ खेतों में अस्थायी आशियाना (झोपड़ी) बनाकर गुजर-बसर कर रहे हैं। घर के बिल्कुल नजदीक नदी होने के कारण बच्चों का वहां जाना आम बात थी, लेकिन इस बार यह लापरवाही काल बन गई। मृतक अंशिका की कहानी और भी दुखद है; उसके पिता का साया पहले ही सिर से उठ चुका था। वह तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटी और सबकी लाडली थी। उसका बड़ा भाई मजदूरी करके किसी तरह परिवार की गाड़ी खींच रहा था, लेकिन इस हादसे ने परिवार की कमर तोड़ दी है।
घटना की सूचना मिलने पर सोनवा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने दोनों बच्चियों के शवों को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला नदी में डूबने का ही लग रहा है, फिर भी घटना के हर पहलू की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है ताकि किसी भी संशय की गुंजाइश न रहे। इस घटना के बाद से गांव के हर घर में चूल्हा नहीं जला है और ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की है।