उत्तर वर्ल्ड की क्राइम रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के आगरा और हाथरस इलाके से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे। साल 2013 में सेवा से बर्खास्त किए गए यूपी पुलिस के एक पूर्व कॉन्स्टेबल रामवीर सिंह (55) ने अपने ऊपर दर्ज दर्जनों आपराधिक मामलों से बचने के लिए खुद की मौत का बेहद खौफनाक नाटक रचा। रामवीर ने हाथरस रेलवे स्टेशन पर एक अनजान भिखारी के ऊपर केरोसिन डालकर उसे ज़िंदा जला दिया और अपनी पहचान साबित करने के लिए शव के पास अपना आधार कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान छोड़ दिया। पुलिस को शुरुआत में लगा कि मरने वाला रामवीर ही है, लेकिन एक छोटे से सुराग ने इस पूरी 'फिल्मी' साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस को शक तब हुआ जब स्टेशन पर रोजाना दिखने वाला एक भिखारी अचानक गायब हो गया। जांच की सुई जब रामवीर के पैतृक गाँव तक पहुँची, तो पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति झुलसी हुई हालत में स्थानीय अस्पताल में भर्ती है। जब पुलिस ने अस्पताल जाकर पड़ताल की, तो पता चला कि वह कोई और नहीं बल्कि रामवीर सिंह ही था, जो भिखारी को जलाते वक्त खुद भी झुलस गया था। पुलिस ने रामवीर के ठीक होने का इंतज़ार किया और बुधवार को अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही उसे गिरफ्तार कर लिया। रामवीर का पुराना आपराधिक इतिहास काफी लंबा है, उस पर फिरोजाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़ और मैनपुरी समेत कई जिलों में हत्या और लूट जैसे 13 गंभीर मामले दर्ज हैं।
उत्तर वर्ल्ड के पाठकों को बता दें कि इस शातिर अपराधी के खिलाफ अब नौगाम जीआरपी थाना में हत्या (बीएनएस की धारा 103(1)) और सबूत मिटाने (धारा 238) के तहत नया मामला दर्ज किया गया है। यह घटना दिखाती है कि कैसे एक कानून का रखवाला ही कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए किसी भी हद तक गिर सकता है। आगरा पुलिस की मुस्तैदी ने एक बेगुनाह की मौत का इंसाफ किया और एक ऐसे अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाया जो खुद को कागजों में 'मरा' घोषित करवाकर कानून की पहुंच से दूर भागना चाहता था।