उत्तर वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर के मुख्य मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने केंद्र सरकार से बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद को मानवीय आधार पर रिहा करने की भावुक अपील की है। इंजीनियर राशिद पिछले पांच वर्षों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं और उनके पिता, खज़िर मोहम्मद शेख, इस समय श्रीनगर के SMHS अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। मीरवाइज ने अस्पताल जाकर बीमार पिता का हालचाल जाना और बताया कि उनकी हालत बेहद नाजुक है और वे अपने बेटे को देखने के लिए तड़प रहे हैं। मीरवाइज ने जोर देकर कहा कि यह पिता-पुत्र की आखिरी मुलाकात भी हो सकती है, इसलिए सरकार को सहानुभूति दिखाते हुए उन्हें पैरोल या रिहाई देनी चाहिए ताकि एक मरते हुए पिता की आखिरी इच्छा पूरी हो सके।
अवामी इत्तेहाद पार्टी के प्रवक्ता इमाम उन नबी के अनुसार, इंजीनियर राशिद के पिता की तबीयत लगातार बिगड़ रही है और उन्हें आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया गया है। पार्टी ने सरकार से आग्रह किया है कि एक सांसद और एक बेटे के रूप में राशिद को अपने बीमार पिता की सेवा करने का मौका दिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि इंजीनियर राशिद को 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने से ठीक पहले एनआईए (NIA) द्वारा टेरर-फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। हालांकि, इसी साल जनवरी में बजट सत्र के दौरान उन्हें संसद में शामिल होने के लिए कस्टडी पैरोल दी गई थी, लेकिन अब उनके परिवार और समर्थकों का मानना है कि इस कठिन समय में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना देश के लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था की गरिमा को बढ़ाएगा।
मीरवाइज उमर फारूक ने इस मौके पर देश और जम्मू-कश्मीर की विभिन्न जेलों में बंद राजनीतिक बंदियों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन कैदियों और उनके परिवारों का "खामोश दर्द" दिल दहला देने वाला है। उत्तर वर्ल्ड के पाठकों के लिए यह मामला केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि भावनाओं और मानवीय अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर विषय है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार और अदालत के फैसले पर टिकी हैं कि क्या एक बुजुर्ग पिता को अपने बेटे से मिलने का आखिरी मौका मिल पाएगा या नहीं।