अंबेडकरनगर। जनपद में खाद की बिक्री को पारदर्शी बनाने और कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब जिले के किसानों को यूरिया, डीएपी या अन्य सरकारी खाद खरीदने के लिए अपनी 'फार्मर आईडी' (Farmer ID) दिखाना अनिवार्य होगा। बिना इस पहचान के किसी भी केंद्र से खाद का वितरण नहीं किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला? अक्सर शिकायतें मिलती थीं कि खाद का लाभ वास्तविक किसानों के बजाय बिचौलियों और बड़े व्यापारियों तक पहुँच जाता था, जिससे सीजन के समय छोटे किसानों को किल्लत का सामना करना पड़ता था। जिला प्रशासन के नए निर्देशों के अनुसार, अब खाद की हर बोरी का हिसाब ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज होगा, जो सीधे किसान की आईडी से लिंक होगा।
कैसे मिलेगी फार्मर आईडी? प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों का डेटा पीएम किसान सम्मान निधि या कृषि विभाग के पोर्टल पर दर्ज है, उनकी आईडी पहले से ही सिस्टम में मौजूद है। जिन किसानों के पास अभी तक आईडी नहीं है, वे अपने नजदीकी जनसेवा केंद्र या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर पंजीकरण करा सकते हैं।
कृषि विभाग की अपील: जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय अपना आधार कार्ड और फार्मर आईडी साथ लेकर आएं। साथ ही, उन्होंने दुकानदारों और समितियों को चेतावनी दी है कि यदि बिना आईडी के खाद वितरण की पुष्टि हुई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।