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फ़िरोज़ाबाद: 41 साल बाद खत्म हुआ 1983 का आपराधिक मामला, अंतिम जीवित अभियुक्त की मौत के बाद कोर्ट ने बंद की फाइल

By Uttar World Desk

20 अप्र, 2026 | 01:45 बजे
फ़िरोज़ाबाद: 41 साल बाद खत्म हुआ 1983 का आपराधिक मामला, अंतिम जीवित अभियुक्त की मौत के बाद कोर्ट ने बंद की फाइल

फ़िरोज़ाबाद। जनपद की एक अदालत ने 41 साल पुराने एक आपराधिक मामले को आखिरकार समाप्त करने का आदेश दिया है। एडीजे एफटीसी-2 कोर्ट के पीठासीन अधिकारी विमल वर्मा ने यह कदम मामले के अंतिम जीवित अभियुक्त की मृत्यु की पुष्टि होने के बाद उठाया है। इसके साथ ही वर्ष 1983 से चली आ रही कानूनी प्रक्रिया पर पूर्ण विराम लग गया है।

क्या था 1983 का वह मामला? यह पूरा विवाद थाना दक्षिण क्षेत्र के चंद्रवार गेट का था। वर्ष 1983 में पुलिस ने बद्री, ग्याजी, बच्चू और रामबाबू नाम के चार व्यक्तियों के खिलाफ गंभीर चोट पहुँचाने और सरकारी सेवक को ड्यूटी से रोकने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया था।

चारों अभियुक्तों की हो चुकी है मृत्यु: लंबे समय तक चले इस वाद विचारण के दौरान बद्री, ग्याजी और बच्चू की पहले ही मौत हो गई थी। अंतिम जीवित अभियुक्त रामबाबू के विरुद्ध कार्रवाई लंबित थी। हाल ही में जब पुलिस रामबाबू के घर पहुंची, तो उनके पुत्र सचिन ने न्यायालय में शपथपत्र दिया कि उनके पिता की मृत्यु 17 फरवरी 2024 को बीमारी के कारण हो चुकी है। साक्ष्य के रूप में क्षेत्रीय पार्षद का लेटर हेड और आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र भी कोर्ट में पेश किया गया।

न्यायालय का आदेश: मामले की सुनवाई करते हुए पीठासीन अधिकारी विमल वर्मा ने स्पष्ट किया कि चूंकि अब इस मामले में कोई भी अभियुक्त जीवित नहीं है, इसलिए पत्रावली पर आगे की कोई कार्रवाई शेष नहीं रह जाती है। न्यायालय ने रामबाबू के विरुद्ध वाद की कार्रवाई को समाप्त करते हुए पत्रावली को दाखिल दफ्तर (Close) करने का आदेश जारी किया है।

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