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अयोध्या: अक्षय तृतीया पर रामलला को अर्पित किया गया '56 भोग', स्वर्ण मुकुट में प्रभु ने दिए अद्भुत दर्शन

By Uttar World Desk

20 अप्र, 2026 | 08:17 बजे
अयोध्या: अक्षय तृतीया पर रामलला को अर्पित किया गया '56 भोग', स्वर्ण मुकुट में प्रभु ने दिए अद्भुत दर्शन

रामनगरी में श्रद्धा का सैलाब: राम मंदिर में पंचामृत अभिषेक के बाद सजे 56 प्रकार के व्यंजन; मठ-मंदिरों में हुए विशेष वैदिक अनुष्ठान और सुंदरकांड पाठ।

अयोध्या। उदया तिथि की मान्यता के चलते रामनगरी अयोध्या में सोमवार को अक्षय तृतीया का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस शुभ अवसर पर पूरी अयोध्या नगरी भक्तिमय नजर आई। राम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला का विशेष श्रृंगार किया गया और उन्हें स्वर्ण मुकुट धारण कराया गया, जिसके दर्शन पाकर भक्त भाव-विभोर हो गए।

रामलला का विशेष श्रृंगार और भोग: अक्षय तृतीया के अवसर पर राम मंदिर में रामलला का पंचामृत अभिषेक किया गया। दोपहर के समय प्रभु को 56 प्रकार के व्यंजनों का महाभोग अर्पित किया गया। गर्मी के मौसम को देखते हुए विशेष रूप से फल, मिष्ठान, शीतल शरबत, जूस, लस्सी और सत्तू का शरबत भी प्रभु को निवेदित किया गया। भक्तों ने लंबी कतारों में लगकर अपने आराध्य के दर्शन किए।

मठ-मंदिरों में अनुष्ठान: हनुमानगढ़ी (नाका) में महंत रामदास के सानिध्य में हनुमंत लला का भव्य श्रृंगार हुआ और लड्डुओं का भोग लगाया गया। यहाँ आयोजित सुंदरकांड पाठ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। विद्याकुंड स्थित वीर भगवान मंदिर में भी सुंदरकांड का पाठ और प्रसाद वितरण हुआ। परिक्रमा मार्ग स्थित दुर्गा काली दरबार में मां अन्नपूर्णा की भव्य झांकी सजाई गई, जिसने भक्तों को आकर्षित किया।

विश्व शांति के लिए वैदिक पाठ: साकेत भवन मंदिर में आचार्य प्रवीण शर्मा के संयोजन में 11 वैदिक आचार्यों ने राष्ट्र कल्याण और विश्व शांति के लिए श्री सूक्त, पुरुष सूक्त और श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ किया। आचार्यों ने बताया कि अक्षय तृतीया सत्कर्म, दान और लोकमंगल का संदेश देने वाला महापर्व है, जिसका फल कभी समाप्त नहीं होता।

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