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अंतर्राष्ट्रीय

यूरोपीय देशों ने UNRWA पर प्रतिबंध लगाने वाले इजरायली कानून की कड़ी निंदा की

By Uttar World Desk

13 मई, 2026 | 06:55 बजे
यूरोपीय देशों ने UNRWA पर प्रतिबंध लगाने वाले इजरायली कानून की कड़ी निंदा की

ब्रसेल्स (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : यूरोपीय देशों के एक बड़े समूह ने इजरायल द्वारा पारित उस नए कानून की तीखी आलोचना की है जो संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी UNRWA की सुविधाओं और सेवाओं को रोकने का प्रयास करता है। यूरोपीय संघ के प्रमुख देशों का मानना है कि यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि इससे गजा और वेस्ट बैंक में रह रहे लाखों शरणार्थियों के लिए मानवीय संकट और भी गहरा हो जाएगा। आयरलैंड, नॉर्वे, स्लोवेनिया और स्पेन जैसे देशों ने एक साझा बयान जारी कर इजरायल से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

क्या है नया इजरायली कानून और विवाद की जड़

इजरायल की संसद ने हाल ही में एक ऐसा कानून पारित किया है जो सरकारी अधिकारियों को UNRWA के साथ किसी भी तरह के संपर्क से रोकता है। इसके अलावा, यह कानून एजेंसी को दी जाने वाली बिजली, पानी और दूरसंचार जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी बंद करने का अधिकार देता है। इजरायल का आरोप है कि UNRWA के कुछ कर्मचारी आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। हालांकि, यूरोपीय देशों का तर्क है कि पूरी संस्था पर प्रतिबंध लगाना उन लाखों निर्दोष नागरिकों के लिए सजा जैसा है जो भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह से इस एजेंसी पर निर्भर हैं।

मानवीय सहायता पर पड़ेगा विनाशकारी असर

यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख ने चेतावनी दी है कि UNRWA के बिना गजा में मानवीय सहायता का वितरण लगभग असंभव हो जाएगा। यह एजेंसी न केवल भोजन बांटती है, बल्कि क्षेत्र में स्कूल और अस्पताल भी चलाती है। यूरोपीय देशों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की किसी भी एजेंसी के काम में बाधा डालना वैश्विक व्यवस्था के सिद्धांतों के खिलाफ है। नॉर्वे के विदेश मंत्री ने कहा कि यह कानून उन फिलीस्तीनियों के लिए जीवन रेखा काटने जैसा है जो पहले से ही भीषण युद्ध और अकाल जैसी स्थितियों का सामना कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायल की बढ़ती घेराबंदी

इस कानून के विरोध में केवल यूरोपीय देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन ने भी चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कदम जिनेवा कन्वेंशन के तहत इजरायल की उन जिम्मेदारियों का उल्लंघन है, जिसमें उसे कब्जे वाले क्षेत्रों में नागरिक आबादी की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना होता है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विधायी कदमों से इजरायल के अपने सहयोगियों के साथ संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं और वैश्विक मंच पर वह अकेला पड़ सकता है।

निष्कर्ष : यूरोपीय देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे UNRWA को वित्तीय सहायता देना जारी रखेंगे और इजरायल पर कूटनीतिक दबाव बनाएंगे ताकि इस कानून को लागू होने से रोका जा सके। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे इजरायल अपने रुख में कोई नरमी लाता है या गजा में मानवीय संकट एक नए और भयावह स्तर पर पहुंच जाता है।

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