काठमांडू (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में बुधवार को राजनीतिक तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब सांसदों ने अगले वित्त वर्ष के लिए सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की लगातार अनुपस्थिति का कड़ा विरोध किया। प्रधानमंत्री के सदन में न आने से नाराज विपक्षी दलों ने कार्यवाही में बाधा डाली और जमकर नारेबाजी की। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक जवाबदेही के तहत प्रधानमंत्री को खुद सांसदों के सवालों का जवाब देना चाहिए।
विपक्षी दलों का जोरदार विरोध और वॉकआउट
संसदीय सत्र के दौरान शाम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हरका राजय ने प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत उपस्थिति की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। उनके समर्थन में कई अन्य सांसद भी विरोध में शामिल हो गए और स्पष्ट किया कि जब तक प्रधानमंत्री शाह खुद सदन में नहीं आएंगे, वे कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। विवाद तब और बढ़ गया जब संसद ने घोषणा की कि वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले प्रधानमंत्री की ओर से जवाब देंगे। विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे संसदीय परंपराओं का उल्लंघन बताया।
इस्तीफे की मांग और नारेबाजी
विपक्षी सदस्यों ने सदन के भीतर नारेबाजी की और मांग की कि यदि प्रधानमंत्री संसद का सामना करने से बच रहे हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मार्च के अंत में रामनवमी के दौरान कार्यभार संभालने के बाद से बालेंद्र शाह ने अभी तक सार्वजनिक रूप से संसद को संबोधित नहीं किया है। इस चुप्पी को लेकर विपक्षी नेता लगातार उन पर निशाना साध रहे हैं और इसे लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं मान रहे हैं।
संसदीय परंपरा और भविष्य का संकट
नेपाल की संसदीय परंपरा के अनुसार, सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री से विपक्ष की चिंताओं का जवाब देने की अपेक्षा की जाती है। बालेंद्र शाह की अनुपस्थिति ने अब एक नया संकट खड़ा कर दिया है। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रधानमंत्री जल्द ही सदन में उपस्थित नहीं होते हैं, तो वे संसद की कार्यवाही को पूरी तरह से ठप कर देंगे। फिलहाल नेपाल की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।