काठमांडू (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर इस साल की चढ़ाई का रास्ता आधिकारिक तौर पर खुल गया है। बुधवार, 13 मई 2026 की सुबह 10:25 बजे 11 अनुभवी नेपाली गाइडों (शेरपाओं) की एक टीम ने 8,848.86 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचकर रस्सियां बांधने का काम पूरा किया। इस सफल अभियान के साथ ही अब बेस कैंप पर इंतजार कर रहे सैकड़ों विदेशी पर्वतारोहियों के लिए एवरेस्ट फतह करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
रिकॉर्ड संख्या में पर्वतारोही और कड़ी चुनौतियां
नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार, इस स्प्रिंग सीजन में एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए अब तक के सबसे अधिक 492 पर्वतारोहियों को परमिट जारी किए गए हैं। प्रत्येक पर्वतारोही के साथ कम से कम एक गाइड होने के कारण, इस बार पहाड़ पर 1,000 से अधिक लोगों की मौजूदगी रहने की उम्मीद है। हालांकि, इस साल खुम्बू आइसफॉल में देरी और खराब मौसम के कारण रस्सी बांधने वाली टीम को भारी दबाव का सामना करना पड़ा।
इन जांबाज शेरों ने खोला रास्ता
अभियान का नेतृत्व करने वाली टीम में मिंग्मा दोरची शेरपा, पासांग ताशी शेरपा, लोपसांग भूटिया और मिंग नोरबू शेरपा जैसे दिग्गज शामिल थे। इस टीम ने 'एक्सपीडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन नेपाल' (EOAN) के समन्वय में काम किया। इन गाइडों ने दुर्गम पहाड़ी रास्तों, ऑक्सीजन की कमी और बर्फीली हवाओं के बीच शिखर तक सुरक्षा रस्सी (Fixed Line) बिछाने का जोखिम भरा काम पूरा किया।
अब शुरू होगा शिखर फतह का सिलसिला
रास्ता खुलने के साथ ही विभिन्न एक्सपीडिशन टीमों ने अपनी 'समिट पुश' (शिखर की ओर अंतिम बढ़त) की तैयारी शुरू कर दी है। अगले कुछ दिनों में मौसम की अनुकूलता देखते हुए सैकड़ों पर्वतारोही शिखर की ओर बढ़ेंगे। हालांकि, इस सीजन में अब तक तीन लोगों की मौत की खबर भी सामने आई है, जो एवरेस्ट की चढ़ाई के जोखिमों को दर्शाती है।
निष्कर्ष
नेपाल के लिए एवरेस्ट पर्यटन आय का एक मुख्य स्रोत है। रिकॉर्ड परमिट और रास्ता खुलने के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें एवरेस्ट पर टिकी हैं। पर्यटन विभाग ने सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने और कतारों (Traffic Jam) से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है।