बेरूत (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो) : लेबनान रेड क्रॉस के अध्यक्ष एंटोनी ज़ोगबी ने इजरायली सेना पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हाल ही में लागू हुए युद्धविराम के बावजूद इजरायली बलों ने अब तक 100 से अधिक पैरामेडिक्स और चिकित्सा कर्मियों की हत्या कर दी है। काहिरा न्यूज चैनल को दिए एक साक्षात्कार में ज़ोगबी ने राहत बचाव कार्यों में लगे कर्मियों को लगातार निशाना बनाए जाने की कड़ी निंदा की। उन्होंने इन हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध बताया और कहा कि आपातकालीन सेवाओं में लगे लोगों को जानबूझकर निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
साढ़े तीन हजार के करीब पहुंची मरने वालों की संख्या
एंटोनी ज़ोगबी के अनुसार 14 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा के बाद से अब तक इजरायली हमलों में 3,080 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 100 से ज्यादा एम्बुलेंस कर्मचारी और चिकित्सा कर्मी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि गजा और लेबनान दोनों ही जगहों पर एम्बुलेंसों या मेडिकल स्टाफ के लिए अब कोई वास्तविक सुरक्षा नहीं बची है। ज़ोगबी ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज हमारी समस्या यह है कि हम खुद निशाना बन गए हैं जैसे कि हम कोई लड़ाके हों जबकि हमारा काम केवल लोगों की जान बचाना है।
अस्पतालों और एम्बुलेंसों पर सीधी बमबारी
लेबनान रेड क्रॉस के अध्यक्ष ने हमलों के विनाशकारी आंकड़ों को साझा करते हुए बताया कि पिछले कुछ हफ्तों में चार बड़े अस्पताल पूरी तरह से बंद हो चुके हैं और 16 अन्य अस्पतालों को सीधे हमलों में भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 200 से अधिक एम्बुलेंसों को भी इसी अवधि के दौरान निशाना बनाया गया है। ज़ोगबी ने कहा कि इन आंकड़ों से मानवीय संकट की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों और चिकित्सा कर्मियों की मौत एक छोटे से अंतराल में हुई है जो युद्धविराम समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठाती है।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाई जा रही है आवाज
लेबनान के अधिकारियों और मानवीय संगठनों ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना शुरू कर दिया है। ज़ोगबी ने कहा कि बचाव और चिकित्सा टीमें अब बेहद खतरनाक परिस्थितियों में काम कर रही हैं। बिना किसी सुरक्षा गारंटी के घायल लोगों तक पहुंचना नामुमकिन होता जा रहा है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से मांग की है कि चिकित्सा कर्मियों और अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इजरायल पर दबाव बनाया जाए ताकि इस मानवीय त्रासदी को और बढ़ने से रोका जा सके।