जिनेवा (उत्तर वर्ल्ड ब्यूरो): संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने नाइजीरिया और चाड की सेनाओं द्वारा उत्तरी नाइजीरिया में किए गए अलग-अलग हवाई हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 100 नागरिकों की जान चली गई है। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों की सरकारों से इन घटनाओं की तुरंत, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।
बाजार और मछुआरों को बनाया गया निशाना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को नाइजीरियाई सेना द्वारा किए गए एक हवाई हमले में एक व्यस्त बाजार को निशाना बनाया गया, जिसमें लगभग 100 आम नागरिक मारे गए। यह हमला नाइजीरियाई सेना और सशस्त्र 'डाकू' गिरोहों के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान हुआ। वहीं, दूसरी ओर चाड की सेना द्वारा किए गए हवाई हमलों में दर्जनों मछुआरों के मारे जाने की खबर है। ये घटनाएं उत्तरी नाइजीरिया के उन इलाकों में हुईं जहाँ सशस्त्र समूह सक्रिय हैं और सेना उनके खिलाफ ऑपरेशन चला रही है।
मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इन घटनाओं को बेहद 'परेशान करने वाला' बताया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल की नाइजीरिया शाखा ने भी इन हमलों की निंदा की है और कहा है कि सेना द्वारा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बार-बार विफलता देखी जा रही है। वोल्कर तुर्क ने अपने बयान में कहा कि यह सुनिश्चित करना दोनों देशों के अधिकारियों का कर्तव्य है कि सैन्य अभियानों के दौरान अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों और मानवीय कानूनों का पूरी तरह से पालन किया जाए।
चाड में राष्ट्रीय शोक और जवाबी कार्रवाई
इन हवाई हमलों से पहले चाड में भी स्थिति तनावपूर्ण थी। हाल ही में बोको हरम के आतंकियों द्वारा चाड के एक सैन्य बेस पर किए गए हमले में दो जनरल सहित कम से कम 24 सैनिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में चाड के राष्ट्रपति महामत डेबी ने आतंकवादियों के खिलाफ बड़ा जवाबी हमला शुरू किया था। हालांकि, इस सैन्य कार्रवाई के दौरान मछुआरों और आम नागरिकों की मौत ने सेना की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष : अफ्रीका के इस साहेल क्षेत्र में आतंकवाद और सैन्य अभियानों के बीच आम नागरिक सबसे अधिक पिस रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की इस मांग ने नाइजीरिया और चाड की सरकारों पर दबाव बढ़ा दिया है। अब यह देखना होगा कि क्या दोनों देश वास्तव में एक पारदर्शी जांच कराते हैं या ये घटनाएं भी पिछले कई हमलों की तरह बिना किसी जवाबदेही के फाइलों में दबकर रह जाएंगी।